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किताबें मुहब्बत, दोस्ती और ज्ञान का जरिया हैं

पुस्तक मेले में आने का मकसद क्या है? दरअसल, नेशनल बुक फाउन्डेशन, पाकिस्तान की किताबें दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में 1से आ रही हैं। पुस्तक मेले अदीबों के मिलने और कोरोबारी नारिए से भी दुनियाभर की किताबों से रू-ब-रू होने का एक अच्छा मौका होता है। नेशनल बुक फाउन्डेशन का काम किस र्ता पर होता है? एकदम इंडिया की नेशनल बुक ट्रस्ट की तरह से। अदीबों-शायरों या यूं क हें कि सभी लिखने वालों की हौंसला अफााई करना, दुनियाभर की अच्छी किताबों का पाकिस्तान में उर्दू व सूबाई भाषाआें में तजरुमा कराके किताबें मुहैया कराना, पुस्तकों को छापकर आम पाठक तक पहुंचाना। किन मुल्कों की किताबों का आप तजरुमा कराते हैं? अभी तक फाउन्डेशन ने अरेबिक, जापानी, चीनी, फोरसी की मशहूर किताबों को उर्दू, सिन्धी, बलोची, पश्तो व पंजाबी में तजरुमा कराकर प्रकाशित किया है। पढ़ने वालों ने इन किताबों का पुरजोर खैर-मकदम (स्वागत) भी किया। पाकिस्तान के लोगकिन भारतीय लेखकों को पढ़ते हैं? मीर तक़ी मीर, सौदा, रघुपति सहाय फिराक़ गोरखपुरी से लेकर इस्मत चुग्तई और कुर्तुल-एन-हैदर के अलावा इन दिनों जो नई पीढ़ी लिख रही है, सभी को पढ़ते हैं। हिन्दी के अदीबों को कितना पढ़ते हैं? हमारे सामने हिन्दी की किताबों के तजरुमे की समस्या है। इसके लिए लोग हैं ही नहीं। हमने इस बार नेशनल बुक ट्रस्ट से कई दौर की वार्ता की है। बातचीत के अच्छे नतीजे भी सामने आने की उम्मीद है। हम हिन्दी किताबों के तजुर्मा के लिए आपसी सहयोग करने की स्थिति में हैं। पिछले दिनों कराची पुस्तक मेले में भारत के एनबीटी के स्टाल पर सिन्धी भाषा में बच्चों की किताबों को बच्चों ने बहुत पसंद किया। दोनों मुल्क़ों के बीच दूरियां कम करने में किताबें मददगार होंगी? आप सियासी इच्छाशक्ित की बात न करें तो मैं क ह सकता हूं-यकीनन। किताबों से इब्तिदा (शुरआत) हुई है। किताबें मुहब्बत, दोस्ती और ज्ञान का ताक़तवरोरिया हैं। पाकिस्तान में हिन्दी को लोकप्रिय बनाने के लिए क्या होना चाहिए?ड्ढr देखिए, किसी भीोबान की लोकप्रियता को उसकी जरूरत बढ़ाकर ही बढ़ाया जा सकता है। इन्डिया और पाकिस्तान के बीच लोगों का आना-जाना जितना ज्यादा होगा, लोगों को हिन्दी और उर्दू की जरूरत होगी और फिर दोनों तरफ इनोबानों को सीखने की ललक पैदा होगी।

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  • Web Title: किताबें मुहब्बत, दोस्ती और ज्ञान का जरिया हैं