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भारत लाया गया किडनी सरगना

भारत लाया गया किडनी सरगनाड्ढr गिरफ्तारी के दो दिन बाद ही नेपाल ने किया प्रत्यर्पणड्ढr नेपाल में संपर्को से बात करता था अमित, नेपाल पुलिस को थी उसके एजेंटों की जानकारी थीड्ढr किडनी डॉन डॉ. अमित कुमार को सीबीआई टीम शनिवार को काठमांडू से यहाँ ले आई। उसके खिलाफ अवैध मानव अंग प्रत्यारोपण, धोखाधड़ी और गलत ढंग से लोगों को कैद रखने का मामला चलाया जाएगा। इसमें उसे अधिकतम 10 साल की जेल हो सकती है। 44 वर्षीय अमित को एयर इंडिया की एक व्यावसायिक उड़ान से यहाँ लाया गया और पूछताछ के लिए सीधे सीबीआई मुख्यालय ले जाया गया। रविवार को उसे स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा, जहाँ से जाँच एजेंसी उसे अपनी हिरासत में लेने की कोशिश करेगी।ड्ढr डॉ. अमित को नेपाल सरकार ने शनिवार को सीबीआई के तीन सदस्यीय दल के सुपुर्द कर दिया। इससे पहले काठमांडू में भारतीय दूतावास ने डॉ. अमित के प्रत्यर्पण का मामला नेपाल सरकार के साथ उठाया। नेपाल सरकार ने इस मामले में उल्लेखनीय सहयोग करते हुए भगोड़े किडनी सरगना को भारत के हवाले कर दिया।ड्ढr सीबीआई ने गुर्दा प्रत्यारोपण कांड की जाँच शुक्रवार को ही औपचारिक रूप से अपने हाथों में ले ली थी। गुड़गाँव पुलिस ने इसमें मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम 1ी धारा 18-1और भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 342, 326, 506 आेर 120 बी के तहत यह मामला दर्ज किया था। उल्लेखनीय है कि डॉ. अमित को जल्द से जल्द धर दबोचने के लिए सीबीआई के अनुरोध पर इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। नेपाल पुलिस ने अमित को चितवन जिले में जंगल स्थित एक रिसोर्ट से गुरुवार को धर दबोचा था। नेपाल पुलिस ने डॉ. अमित की गिरफ्तारी के बाद कहा था कि वह उसके खिलाफ विदेशी मुद्रा विनिमय नियमों के उल्लंघन के तहत मामला दर्ज करने की तैयारी कर रही है और रविवार को उसे काठमांडू के अदालत में पेश किया जाएगा। लेकिन सीबीआई के अनुरोध पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने पहल की और किडनी डॉन का प्रत्यर्पण करा लिया। सीबीआई ने शुक्रवार देर शाम हरियाणा सरकार की अर्जी पर उसके खिलाफ मानव अंगों के अवैध व्यापार और अन्य मामलों में मुकदमा दर्ज किया था।ड्ढr अमित से पूछताछ में नेपाल पुलिस को पता चला है कि वह दो सिमकार्डो के जरिए नेपाल स्थित संपर्को से बात कर रहा था। अमित ने सोचा था कि पैसे लेकर नेपाल पुलिस उसे छोड़ देगी। पकड़े जाने पर उसने इंस्पेक्टर प्रकाश मल्ला से कहा था कि वह एक करोड़ रुपए ले ले और उसे रिहा कर दे। नेपाल पुलिस को उसके पास से ऐसे दस्तावेज भी मिले हैं जिनसे पता चलता है कि वह नेपाली नागरिकता और पासपोर्ट हासिल कर अपने परिवार के पास कनाडा जाने की जुगत भिड़ा रहा था। नेपाल पुलिस को पहले ही पता चल चुका है कि पंकज झा नाम के एक शख्स को उसने अपना एजेंट बना रखा था। पंकज झा के जरिए वह नेपाल में प्रत्यारोपण के लिए अस्पताल खोज रहा था। पंकज अब तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं चढ़ सका है।ड्ढr डॉ. अमित ने माना है कि उसने भारत में करीब 300 किडनी प्रत्यारोपण किए थे, हालाँकि उसका दावा है कि उसने कोई गैरकानूनी काम नहीं किया है। नेपाल पुलिस के मुताबिक अमित ने पूछताछ में माना कि उसने एक-एक प्रत्यारोपण के लिए तीन से चार लाख रुपए लिए। ड्ढr ं

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