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सलाह

ौन कहता है कि पुरानेवाले राजा मंदिर और पोथी-पतरा के विरोधी हैं। यह एकदम से गलत है। उन्होंने हाल के वषरे में देश के लगभग सभी प्रमुख देवस्थलों का भ्रमण कर लिया। पिछले दशहरा में गांव के मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा कर आए। नई बात यह है कि इन दिनों मुलाकातियों को मंदिर में ही शादी-ब्याह करने की सलाह दे रहे हैं। कुछ दिन पहले एक सज्जन शादी का कार्ड लेकर उनके पास पहुंचे। उनकी नजर कार्ड पर गई। विवाह स्थल देखते ही शुरू हो गए-मंदिर में काहे नहीं कर लेते हो शादी। बाहर में शादी करोगे तो बारात लोग लालपानी भी मांगेगा। अधिक खर्च हो जाएगा। मंदिर में कम खर्च होगा।ड्ढr ड्ढr चूजा-बीयरड्ढr ड्ढr छोटे सरकार खांटी वैष्णव हैं। विडम्बना देखिए कि राज्य के विकास की इन दिनों जब कभी चर्चा होती है तो उन्हें तामसी भोजन और पेय का उदाहरण देना पड़ता है। उस दिन देश के एक बड़े उद्योगपति पटना पधारे थे। बड़े और छोटे सरकार एक साथ बताने में जुटे थे कि राज्य में निवेश की काफी संभावनाएं हैं। छोटे सरकार की बारी आई तो उन्होंने बताया कि हमारी सरकार बनने से पहले राज्य में रोजाना ढाई लाख चूजे की बिक्री होती थी। अब आठ लाख चूजे बिक रहे हैं। उद्योगपति इस जानकारी से उत्साहित हुए। छोटे सरकार ने उनका और ज्ञानवर्धन किया-जल्द ही राज्य में बीयर का कारखाना भी खुलने जा रहा है। उनके मुंह से चूजा और बीयर का विस्तृत विवरण सुनकर बड़े सरकार मुस्कुरा उठे। इसे कहते हैं मार्केटिंग।ड्ढr ड्ढr प्रार्थनाड्ढr ड्ढr विभाग के मंत्रियांे और उनके अफसरों के बीच हमेशा 36 का ही रिश्ता नहीं रहता है। अपनापा भी रहता है। खुद देखिए-एक राज्यमंत्री का पांव टूटा। प्लास्टर चढ़ानी पड़ी। बिस्तर पर पड़े रहने के दौरान उन्होंने सरकारी घर के अहाते में ही एक-दो बैठक बुलाई। बैठक से लौटते ही अफसरों ने समवेत स्वर में ईश्वर की प्रार्थना की-हे प्रभो, जल्द से जल्द इनके पांव के प्लास्टर खुलवा दो। असर पड़ा। पांव ठीक हो गए। अब वे दफ्तर आ-जा रहे हैं। अफसरों ने प्रार्थना क्यों की? इसलिए कि सरकारी घर के अहाते में होनेवाली बैठक के दौरान जब राज्यमंत्री दहाड़ते थे तो आसपास के लोग तमाशा देखने के लिए बालकोनी में आ जाते थे। अफसरों को शर्म आती थी। बंद कमरे की डांट-फटकार का कोई वैल्यू है क्या?ड्ढr ड्ढr नम्बर गेमड्ढr ड्ढr यह नम्बर का दिलचस्प गेम है। हार्डिग रोड के कई सरकारी मकान एक ही नम्बर के हैं। एक मूल नम्बर है। दूसरे में उसी नम्बर के साथ ए जुड़ा है। नम्बर का खेल देखिए। एक मकान में भाजपा के विधायक रहते हैं। उसी नम्बर के ए वाले मकान में जदयू के विधान पार्षद का निवास है। जदयू के नेताजी के मुलाकाती धोखे से भाजपा विधायक के मकान में घुस गया तो उसकी खूब खातिरदारी होती है। अगर मुलाकाती खेतिहर किस्म का है तो उससे बागवानी का काम लिया जाता है। अगर कलाकार है तो गाना गवाया जाता है। बिजली मिस्त्री है तो वायरिंग का काम लिया जाता है। काम होने के बाद मुलाकाती को बता दिया जाता है कि विधान पार्षद का मकान बगल में है।ड्ढr ड्ढr चुप्पीड्ढr ड्ढr एक तो नेताजी, ऊपर से प्रोफेसर। मौका मिल जाए तो 45 मिनट से कम क्या बोलेंगे। मगर यह गुजरे जमाने की बात है। ताजा हाल यह है कि बेचारे फुसफुसा कर रह जाते हैं। मन की बात मन में ही रह जाती है। उनके साथ छह महीने पहले एक हादसा हुआ। बोल गए कि बम तो गुजरातवाले मोदी हैं। अपने वाले मोदी तो फुलझड़ी हैं। बम अपनी जगह रहा। हिला भी नहीं। इधर फुलझड़ी ऐसी फटी कि प्रोफेसर साहब ने चुप्पी साध ली। आज भी जब कभी उनके गले में न बोलने के कारण खुजली जैसी महसूस होती है, वे कोई टिकिया खाकर इसे दूर कर लेते हैं। बोलते नहीं हैं।ं

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  • Web Title: राज दरबार