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देश में स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश में जोर

ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन पर अंतरराष्ट्रीय सलाहकार दल के अध्यक्ष प्रो. जैफ्री सैच ने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए भारत में जन स्वास्थ्य योजनाओं पर धन के निवेश को बढ़ाया जाना जरूरी है। वर्तमान समय में भारत में बजटीय आवंटन का 1 प्रतिशत ही स्वास्थ्य पर खर्च किया जाता है। प्रो. जैफ्री कोलंबिया विश्वविद्यालय के अर्थ संस्थान के निदेशक हैं। प्रो. जैफ्री राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन पर अंतरराष्ट्रीय सलाहकार दल की तीसरी बैठक के बाद एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य मंत्री डा. अंबुमणि रामदास ने की। प्रो. जैफ्री ने कहा कि उचित होगा कि केन्द्र सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में बजटीय आवंटन का 3 प्रतिशत तक खर्च करे। उनका कहना था कि लंबे समय तक भारत में जन स्वास्थ्य की उपेक्षा होती रही है। लेकिन गत कुछ वर्षो से देश ने इस दिशा में बहुत तरक्की की है। स्वास्थ्य में निवेश को भारी वित्तीय आय का स्रेत मानते हुए उन्होंने कहा कि परंपरागत रूप से राष्ट्रीय आय का 1 प्रतिशत ही स्वास्थ्य पर खर्च किया जाता है, लेकिन अब समय आ गया है कि इसे बढ़ाकर 3 प्रतिशत किया जाए। यद्यपि देश में कुपोषण एक चुनौती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा पोषण की समस्या पर भी ध्यान देने की जरूरत है। दरअसल जरूरत से ज्यादा पोषण की वजह से कार्डीवैसक्यूलर बीमारियां होती हैं। शिशु और बाल मृत्यु दर गिरी है, लेकिन इसे और कम किए जाने की जरूरत है। इस बैठक में मिशन की पिछली बैठक में हुई चर्चा की समीक्षा, स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार की प्रक्रिया, विविध स्तरों पर जरूरी मानव संसाधन,जन स्वास्थ्य में प्रशिक्षण, विकेन्द्रीकरण, स्थानीय प्रबंधन पोषण सुधार, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, उभरती असंक्रमित बीमारियों, एचआईवी-एड्स, मलेरिया, कालाजार और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए सार्वजनिक भागीदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।ं

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