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पैसेंजर कम इसलिए किराया कम

म किराये वाली एयरलाइनों की मार से प्रभावित हो रहे रेलवे के वातानुकूलित शयनयान (एसी टू टियर) के किराए में और कमी की जा सकती है। रेल मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इस बार चुनावी रेल बजट में रेल मंत्री लालू प्रसाद वैसे भी यात्री किरायों में कमी की घोषणा कर सकते हैं, लेकिन एसी टू टियर का भाड़ा कम करना सिर्फ लोक लुभावन नहीं है। तमाम एयरलाइनों के द्वारा सस्ती विमान सेवाएं उपलब्ध कराने के कारण बड़े पैमाने पर यात्री एसी टू टियर की बजाय हवाई यात्रा पसंद करने लगे हैं। इसमें उन्हें लगभग समान भाड़े में जल्दी गंतव्य तक पहुंचने का विकल्प मिलता है। कई बार तो कुछ एयरलाइनें एसी टू टियर के भाड़े से भी कम दाम पर गंतव्य तक पहुंचा देती हैं। कम किराए वाली एयरलाइनों से मिल रही कड़ी प्रतिद्वंद्विता के मद्देनजर रेलवे ने पिछले रेल बजट में एसी फर्स्ट क्लास और एसी टू टियर के किराए में भी कमी की थी। लेकिन रेलवे के आंकड़े बता रहे हैं कि इसका खासकर एसी टू टियर के यात्रियों पर सकारात्मक असर नहीं हुआ। 2006-07 के दौरान अप्रैल से दिसंबर महीने तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जहां एसी फर्स्ट क्लास और एसी थ्री टियर के यात्रियों में वृ िकी दर 23-24 फीसदी थी, वहीं एसी टू टियर के यात्रियों की संख्या में वृ िकी दर महज 7.46 फीसदी दर्ज की गई। सूत्रों के अनुसार रेलवे की एसी थ्री टियर की यात्रा मध्यम वर्ग को आकर्षित करने में सर्वाधिक सफल रही है। इस श्रेणी के यात्रियों में अब वे लोग भी होते हैं जो आमतौर पर स्लीपर क्लास में यात्रा करते रहे हैं लेकिन स्लीपर क्लास और एसी थ्री टियर के भाड़े में अंतर कम रह जाने के कारण एसी थ्री टियर और एसी चेयर-कार में यात्रा पसंद करने लगे हैं। एसी फर्स्ट क्लास में यात्रा को तरजीह देने वाले लोगों में अधिकतर आरामतलब, संपन्न वर्ग के साथ ही सरकारी अधिकारी और कंपनी खाते में यात्रा करने वाले लोग होते हैं।

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