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जन्मस्थान में उपेक्षित ‘निराला’

हिंदी के यशस्वी कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ अपने जन्मस्थान महिषादल में ही उपेक्षित हैं। पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जिले के महिषादल में ही सन् 18में बसंत पंचमी के दिन उनका जन्म हुआ था। तब महिषादल राज में उनके पिता रामसहाय त्रिपाठी काम करते थे। सूर्यकांत की स्कूली शिक्षा महिषादल में ही हुई। 101 में महिषादल की बांग्ला पाठशाला में दाखिला कराया गया और पाठशाला की शिक्षा पूरी होने के बाद 107 में महिषादल राज हाईस्कूल में उनका दाखिला हुआ। 1में उन्हें यह स्कूल छोड़ना पड़ा, क्योंकि नौकरी करना अनिवार्य था। तब तक वे नौवीं कक्षा ही पास कर सके थे। महिषादल निराला की कर्मभूमि भी रही। 1में महिषादल राजबाड़ी में नौकरी शुरू की। 1में नौकरी छोड़ दी और ‘समन्वय’ का संपादन करने लगे। कोलकाता से भी निराला का लंबे समय तक घनिष्ठ नाता रहा। 1में ‘मतवाला’ के प्रथम पृष्ठ पर उनकी कविताएं छपती थीं और निराला की ख्याति दूर-दूर तक फैल गई। जिसकी धरती से निराला का वर्षो संबंध रहा, उसकी गरिमा के अनुकूल कोई स्मारक नहीं बनाया। वाम सरकार ने तो महिषादल में निराला की मूर्ति तक नहीं लगाई। अंतत: यूपी के तत्कालीन राज्यपाल प्रो.विष्णुकांत शास्त्री को आगे आना पड़ा था। उनकी पहल पर ही छह साल पहले तत्कालीन केंद्र ने निराला की मूर्ति के लिए दो लाख रुपए मंजूर किए थे।ं

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