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अफगानिस्तान में ठंड ने ली कइयों की जान

हिंसा और अशांति से बदहाल अफगानिस्तान इन दिनों रिकार्डतोड़ ठंड का प्रकोप झेल रहा है। हेरात स्थित अस्पताल में 0 से अधिक लोग भरती हैं, जो मौसम की ठंड के कारण उत्पन्न किसी न किसी समस्या प्रभावित हुए हैं। इनमें से कई गड़ेरिये हैं जो अपने पालतू बकरों व भेड़ों को चराने के सिलसिले में पश्चिमी प्रांत में आई बर्फीली आंधी की चपेट में आ गए। इस युद्ध प्रभावित देश में यह कम से कम एक दशक के अंतराल में सबसे अधिक ठंड है और इस बिगड़े मौसम के कारण 650 से अधिक लोगों के मरने की खबर है, जबकि कइयों को अपने हाथ-पैर गंवाने पड़े हैं। अस्पताल में भरती 18 वर्षीय अहमद सादिक ने कहा कि मैं दो दिनों तक बर्फ से घिरा रहा और वापस लौटने का रास्ता नहीं खोज सका। उसका एक पैर काट दिया गया है और डाक्टरों ने कहा है कि दूसरा पैर भी काटना पड़ेगा। बेहिसाब ठंड ने उसके पैरों को बेकार कर दिया था। अहमद कहता है कि मैं इस तरह अपंग बनकर जीना नहीं चाहता। मैं कहीं आ-जा नहीं सकता। इस तरह जीने से मर जाना ही बेहतर है।

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