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कई महीनों से ‘गीता’ पढ़ रहे डा. गौतम गोस्वामी

नश्वर जीवन की सच्चाई जानने में लगे हैं पटना के पूर्व डीएम डॉ.गौतम गोस्वामी। बाढ़ राहत घोटले में निलंबित डॉ.गोस्वामी की नजरों में अब उन सब चीजों के कोई मायने नहीं हैं जिनके पीछे आदमी भागता रहता है। इंसान पद और पावर से नहीं बल्कि अपने व्यक्ितत्व से जाना और पहचाना जाता है।ड्ढr ड्ढr कभी हार न मानने वाले डॉ.गोस्वामी कई महीनों से ‘गीता’ पढ़ रहे हैं। उनकी नजर में ‘गीता’ हर व्यक्ित को पढ़नी चाहिए ताकि उसे इस बात का एहसास हो कि खाली हाथ आने वाले खाली हाथ ही जाते हैं। डॉ.गोस्वामी अब कैंसर से जूझ रहे हैं। उनका इलाज कीमोथिरेपी से हो रहा है। उन्हें कैंसर है, इसका एहसास शायद उन्हें पहले ही हो चुका था। पर, उन्होंने चुप्पी साधे रखी। डॉ. गोस्वामी कभी पूर्व प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की चुनावी सभा में आदर्श आचार संहिता का हवाला देकर उन्हें भाषण रोकने की बात कहने पर टाइम मैगजीन की सुर्खियों भी बने। बेहतर काम के लिए उन्हें के.जे.राव तक की वाहवाही मिली। लेकिन बाढ़ राहत घोटाले की फाइल खुली तो उन्हें जेल भी जाना पड़ा। डॉ.गोस्वामी अब सिर्फ अपने परिवार के साथ हैं।ड्ढr ड्ढr पिछले दिनों सचिवालय के गलियारों में चलते-चलते डॉ.गोस्वामी ने कहा मैं ‘गीता’ पढ़ रहा हूं। कहा-आपके भाग्य में जितना है उससे ज्यादा कुछ नहीं हो सकता। सबकुछ फिक्स है यार। रिश्ते-नाते, रुपया-पैसा, पद-पावर सब बस ऐसे ही है। कुछ पल रुक कर बोले-अब सोचता हूं, मैं आईएएस क्यूं बना। आईएएस बना तो पटना का डीएम ही क्यों बना? डॉक्टर का पेशा कितना अच्छा था। लेकिन मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं। न लोगों से और न ही मीडिया से। सबको अपने तरीके से सोचने की आजादी है।बातचीत में ही डॉ.गोस्वामी ने कहा कि वह कुछ लिखना चाहते हैं। पूछने पर बस इतना कहा-जब पूरी हो जाएगी तभी बताऊंगा।

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