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राजीवनगर के 152 से अधिक घरों पर लगा ग्रहण

राजधानी के राजीवनगर मुहल्ले में स्थित 152 से अधिक घरों पर ‘ग्रहण’ लग गया है। इनमें दर्जनों मकान बन चुके हैं जबकि कइयों में निर्माण प्रक्रिया अभी भी जारी है। आरोप है कि बिहार राज्य आवास बोर्ड की जमीन पर अतिक्रमण करके लोगों ने यहां आशियां बनाया है। बोर्ड की शिकायत के बाद पटना पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। आरंभिक छानबीन के आधार पर 152 लोगों की सूची तैयार की गई है जिन्होंने अवैध निर्माण किया है। इस बाबत राजीवनगर थाने में आईपीसी की धारा 420, 448 व 34 प्राथमिकी (संख्या - 15008) दर्ज की गई है।ड्ढr ड्ढr इधर रविवार की रात से शुरू हुई तहकीकात में पुलिस अधिकारी उस समय चौंक गये जब मांगने के बावजूद मकान मालिकों ने संबंधित जमीन के वैध कागजात नहीं दिखाये। आलम यह था कि पुलिस के सामने लोग मकान मालिक का नाम भी बताने से कतराते रहे। आखिरकार आधे-अधूरे नाम-पता पर ही पुलिस को मामला दर्ज करना पड़ा। प्राथमिकी में पुलिस ने छल से जमीन का कागजात बनवा कर आवास बोर्ड के भूभाग पर कब्जा कर लोगों द्वारा घरों का निर्माण किये जाने का आरोप लगाया है। सोमवार को इस संबंध में डीएसपी (विधि-व्यवस्था) कुमार अमर सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। दोषियों पर आरोप सत्यापित होने के बाद गिरफ्तारी से लेकर अन्य उचित कानूनी कार्रवाई की जायेगी। मकान तोड़ने या हटाने के बारे में आवास बोर्ड ही निर्णय लेगा।ड्ढr ड्ढr हालांकि नगर विकास एवं आवास मंत्री अश्विनी चौबे ने इस प्राथमिकी से अनभिज्ञता प्रगट की, लेकिन उन्होंने कहा कि न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप जनहित में जो भी निर्णय होगा, सरकार लेगी। उन्होंने कहा कि जब मामला सरकार के पास आएगा तो आगे की कार्रवाई होगी। फिलहाल वे इस मामले की जानकारी लेंगे। उधर आवास बोर्ड के अध्यक्ष एम.एम. सिंह ने भी प्राथमिकी किए जाने से अनभिज्ञता जाहिर की।ड्ढr ड्ढr आवास बोर्ड ने अवैध कब्जेदारों को चेतावनी देते हुए कहा था कि दीघा में बोर्ड द्वारा अर्जित भूमि के सेक्टर 1, 2, 5, 8 एवं 10 (अशियाना दीघा सड़क के पश्चिम) में विभिन्न प्रकार के निर्माण का सर्वेक्षण 10 जनवरी से 2जनवरी के बीच जिला प्रशासन से कराया गया है। इस संबंध में अब आवास बोर्ड और राज्य सरकार के स्तर पर निर्णय लिया जाना है। हालांकि आवास बोर्ड ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि सर्वेक्षण के पश्चात अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के लिए बोर्ड स्वतंत्र होगा और इसकी जिम्मेवारी अवैध निर्माणकर्ता पर होगी। बोर्ड ने संबंधित क्षेत्र के लोगों से आवास बोर्ड की जमीन पर किसी प्रकार का निर्माण नहीं करने की अपनी चेतावनी फिर दुहराई है।ड्ढr ड्ढr खाली भूखंडों पर काम शुरू करने से बिगड़ा मामलाड्ढr पटना (हि.प्र.)। रविवार को एकाएक लगभग दो सौ से अधिक की संख्या में लोगों द्वारा राजीव नगर के खाली भूखंड पर निर्माण कार्य शुरू कर देने के बाद मामला बिगड़ गया। इस भूखंड की रखवाली में लगे कर्मचारियों ने इसकी सूचना बोर्ड के वरीय पदाधिकारी को दी। इसके बाद बोर्ड की सूचना पर डीएसपी व राजीव नगर के थाना प्रभारी दलबल के साथ निर्माण स्थल पर पहुंच गये। अवैध निर्माण को रोकने के लिए पुलिस द्वारा निर्माण कर रहे लोगों पर लाठीचार्ज किया गया। इसमें कुछ लोग घायल भी हुए।ड्ढr ड्ढr आवास बचाआे समिति के सदस्य रामविलास आचार्य ने बताया कि रविवार को एकाएक विभिन्न खाली भूखंडों पर निर्माण कार्य शुरू करने वालों खिलाफ पुलिस द्वारा मामला दर्ज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 तक बने मकानों के मालिकों के खिलाफ अभी पुलिस द्वारा मामला दर्ज नहीं किया गया है। वैसे रविवार को दर्ज प्राथमिकी के बाद राजीव नगर (दीघा) स्थित आवास बोर्ड द्वारा 1में अर्जित 1024.52 एकड़ जमीन पर विवाद एक बार फिर से गहरा गया है। इसको लेकर लंबे समय से राजीव नगर के निवासियों और आवास बोर्ड के बीच झगड़ा चल रहा है। बोर्ड ने अधिग्रहण के बाद राज्य के अंदर वहां की जमीन की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी थी। इसके बाद लोगों ने दूसरे राज्यों में रजिस्ट्री कराकर मकान बनाया। वर्ष 2000 में देश के किसी भी हिस्से में राजीव नगर के जीमन की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी गई। इसके बाद कुछ लोगों ने किसानों से पावर ऑफ अटर्नी लेना शुरू कर दिया।ड्ढr ड्ढr आवास बचाआे समिति के सदस्य रामविलास आचार्य ने बताया कि दीघा-आशियाना रोड के पश्चिम 300 से अधिक लोगों ने पक्के छत का मकान बना लिया है। वहीं लगभग 300 लोगों द्वारा आउट हाउस की तर्ज पर निर्माण किया गया है। समिति के द्वारा आवास बोर्ड को लिखित रूप से सेटल्मेंट कराने का आग्रह किया गया है। बोर्ड द्वारा 16 से 2जनवरी तक दीघा-आशियाना रोड के पश्चिम में बने मकानों और खाली भूखंडों का सर्वे करया गया है। समिति भी अपनी आेर से सर्वे का कार्य करा रही है। वर्ष 2000 के बाद बने 200 मकानों को ध्वस्त करने की बात बोर्ड द्वारा कही गयी है। हालांकि इस संबंध में 14 फरवरी को होने वाली बोर्ड की बैठक के बाद ही निर्णय लेने की बात प्रबंध निदेशक ने कही है।

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