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ग्रामीण महिलाओं का होगा सांस्कृतिक संवर्धन

मजोर वर्ग की ग्रामीण महिलाओं की पेट की आग में अब कला की भूख भस्म नहीं होगी। उनके लिये दो जून की रोटी का तो इंतजाम होगा ही साथ ही उनकी नृत्य, गीत व संगीत की प्रतिभा भी निखारी जाएगी। गरीबी के चलते अब उनकी कलात्मक क्षमता को नहीं मरने दिया जाएगा। राज्य महिला विकास निगम ने ग्रामीण क्षेत्रों की कमजोर वर्ग की महिलाओं की नैसर्गिक कला को आगे बढ़ाने व उन्हें सांस्कृतिक रूप से संवर्धित करने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना बनायी है।ड्ढr ड्ढr निगम सूत्रों के अनुसार नारी शक्ित योजना के अंतर्र्गत ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को सांस्कृतिक रूप से भी संवर्धित किया जाएगा। गांव-देहातों में कमजोर वर्ग की महिलाओं के बीच से ऐसी महिलाओं को चिह्न्ति किया जाएगा जिनमें गीत,संगीत नृत्य व अभिनय की क्षमता है। इन महिलाओं की पहचान कर उन्हें उचित प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी। उनकी प्रतिभा को आम लोगों के बीच तक ले जाने की भी व्यवस्था की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक इस योजना को अमलीजामा पहनाने की कवायद शुरू है। निगम द्वारा इसके लिए जरूरी ‘गाइडलाइन्स’ बनाए गए हैं कि कैसे इस योजना को सरजमीन पर उतारा जाए। हालांकि अबतक राशि का आवंटन नहीं होने के चलते इस योजना की शुरुआत नहीं की जा सकी है। ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए सांस्कृतिक संवर्धन के साथ ही कई अन्य योजनाएं भी शुरू होंगी जिनपर करीब 22 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

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