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बीच शहर में आयोजन के लिए अच्छी जगह तो दें

धार्मिक, सांस्कृतिक और औद्योगिक कार्यक्रमों के आयोजक गुस्से में हैं। उनका गुस्सा लक्ष्मण मेला मैदान के स्वरूप में परिवर्तन की कोशिश को लेकर है। कई इसलिए गुस्से में हैं कि उन्होंने अपने कार्यक्रमों के लिए मैदान की बुकिंग कराई थी जिसे रद कर दिया गया है। इन आयोजनों के पर्चे छपवाने, निमंत्रण भेजने सहित अन्य तैयारियों पर लाखों रुपए खर्च हो चुके हैं।ड्ढr शुभ संस्कार समिति के महामंत्री ऋद्धि किशोर गौड़ कहते हैं कि हम खुद गोमती संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं। सरकारों को वैसे तो कभी गोमती की चिन्ता नहीं रहती। लक्ष्मण मेला स्थल को लेकर सरकार की चिन्ता समझ नहीं आती। लक्ष्मण जी के नाम पर शहर में यही एक पार्क है। इस नाम को मिटाने की मंशा से ही वहाँ पर आयोजनों पर रोक लगाई जा रही है। रामचरित मानस समिति के सचिव कन्हैया लाल वर्मा कहते हैं कि हरियाली के लिए गोमती के किनारे बहुत सी जमीन पड़ी है। सरकार लक्ष्मण मेला मैदान पर होने वाले आयोजनों पर रोक लगाकर यहाँ पौधे लगवाती है तो वे इसका विरोध करेंगे। फूड एक्सपो का आयोजन करने वाले इण्डियन इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रवीण सडाना के अनुसार पूरे लखनऊ में किसी भी आयोजन के लिए लक्ष्मण मेला मैदान ही सबसे मुफीद जगह है। यहाँ आयोजनों पर रोक लगाने से पहले सरकार को इसका विकल्प भी देना चाहिए था। अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुमन्त बताते हैं कि उन्होंने 6 अप्रैल को वैवाहिक परिचय सम्मेलन और वरिष्ठजन सम्मान समारोह का आयोजन लक्ष्मण मेला स्थल पर ही तय किया था। अचानक स्थल पर कार्यक्रम करने की रोक लगा दी गई। वे इसके खिलाफ न्यायपालिका की शरण लेंगे। ऐशबाग रामलीला समिति के महामंत्री हरिचरण अग्रवाल कहते हैं कि पौधों से उनका कोई विरोध नहीं है। लेकिन लक्ष्मण मेला मैदान पर जिस मंशा से यह किया जा रहा है उससे साफ झलकता है कि सरकार को राम और लक्ष्मण के नामों से दुराव है।

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