DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बिहार पुलिस व होमगार्ड को सौंपी जाएगी जिम्मेदारी

चुनावों में हनक बनाने के लिए सीआरपीएफ का जमाना अब लद चुका है। खासकर राज्य निर्वाचन आयोग ने अब केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों के मुकाबले होमगार्ड और बिहार पुलिस के बूते ही वह सब करने का रास्ता निकाल लिया है, जिसपर चलकर शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराए जा सकते हैं। हिंसा रोकने के लिए आयोग के बनाए कुछ नए नियम और बिहार पुलिस तथा होमगार्ड के बूते शांतिपूर्ण चुनावों के सफल प्रयोग के बाद आयोग ने अर्धसैनिक बलों का दामन न थामने का मूड बना लिया है। अप्रैल में शहरी निकायों के रिक्त पदों के लिए उप चुनाव होना है। वहीं दो नवनगठित नगर पंचायत केसरिया और साहेबगंज में पहली बार चुनाव होना है। आयोग ने संबंधित जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव जिलों में उपलब्ध संसाधन से ही कराए जाएंगे। यानि चुनाव में बिहार पुलिस और होमगार्ड के जवानों को ही लगाया जाएगा। यह पहलीबार नहीं है। इसके पहले दिसंबर में संपन्न पंचायत उप चुनाव में भी आयोग ने केन्द्रीय बलों के बदले बिहार पुलिस और होमगार्ड के जवानों को ही चुनावी डय़ूटी पर लगाया और शांतिपूर्ण चुनाव करा लिए गए। गत वर्ष संपन्न शहरी निकाय चुनाव में भी बिहार पुलिस और होमगार्ड के जवानों ने केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों की कमी खलने नहीं दी। आयोग के आयुक्त जे.के.दत्ता पहले ही कह चुके हैं कि चुनाव कराने के लिए राज्य का अपना संसाधन ही पर्याप्त है।ड्ढr ड्ढr दरअसल आयोग ने हिंसा पर काबू पाने के लिए नियमों को ही इतना सख्त कर दिया है कि उम्मीदवार गड़बड़ी की बात सोच भी नहीं सकते। जिस वार्ड या पंचायत में हिंसा हुई तो संबंधित वार्ड के उम्मीदवारों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर स्पीडी ट्रॉयल कराया जाएगा। यह फामरूला हिट हो गया और मतदान के दिन पटाखा तक नहीं फूटे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: बिहार पुलिस व होमगार्ड को सौंपी जाएगी जिम्मेदारी