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ठप न हो जाएँ वैज्ञानिक गतिविधियाँ

प्रदेश में वैज्ञानिक ढँूढ़े नहीं मिल रहे हैं। वेतन व सुविधाआें में कमी से युवा विज्ञानी दूसरे शोध संस्थानों में जा रहे हैं और अन्य वैज्ञानिक प्रदेश की सरकारी सेवाआें में आने को तैयार नहीं। विदेश उनकी पहली पसंद है। सरकारी सेवा के लिए वे कर्नाटक को बेहतर मानते हैं। इसी कारण प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में वैज्ञानिक अधिकारियों का जबरदस्त संकट पैदा हो गया है। विभाग में अब कुल 10 वैज्ञानिक अधिकारी बचे हैं। कुल पद 30 सृजित हुए थे पर तत्काल जरूरत 70 वैज्ञानिक अधिकारियों की है। वैज्ञानिक अधिकारियों की संख्या कम होने से विज्ञान-आधारित योजनाएँ बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। शोध के नए क्षेत्र तलाशने, नई प्रौद्योगिकी विकसित करने, ग्रामीण क्षेत्रों में विज्ञान को लोकप्रिय बनाने, जैव प्रौद्योगिकी का विकास, स्कूल व कॉलेजों में वैज्ञानिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देने जैसे काम ठप पड़ रहे हैं।ड्ढr युवा वैज्ञानिक प्रादेशिक सेवाआें को तवज्जो नहीं दे रहे हैं, इसी से वैज्ञानिक अधिकारियों का टोटा-सा हो गया है। कारण, यहाँ की वेतन व सेवा शर्ते केन्द्रीय और अन्य प्रदेशों के शोध संस्थानों की अपेक्षा काफी कम है। विभाग में पेंशन व पदोन्नति नीति भी नहीं है। इसी वजह से संयुक्त निदेशक के कुल सृजित छह पदों में चार पद खाली चल रहे हैं। इसके लिए वैज्ञानिक आवेदन नहीं करते, क्योंकि संयुक्त निदेशक पद पर भर्ती होने के बाद उन्हें पदोन्नति नहीं मिलती।ड्ढr ं

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