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प्राणरक्षा के लिए पिता-पुत्र बने भिखारी

बर्तोल्त ब्रेख्त के मुताबिक ‘पूरी कायनात रंगमंच है और हम सब अभिनेता। नियंता ने जिसकी जो भूमिका लिख दी, वह उसे निभा रहा है’। ब्रेख्त के इस कथन को असल जिंदगी में एक पिता-पुत्र बखूबी निभा रहे हैं। वह भी भिखारी बनकर। इनको देखकर लोग दंग हैं लेकिन चरित्र ओढ़ने की इस मजबूरी के पीछे की विडंबना बहुत ही भयावह और त्रासद है। जो बिहार में सामंती समृद्धि और न्याय की हकीकत पर अट्टहास करती है। करीब 0 वर्षीय यह पिता और 72 वर्षीय उसका पुत्र प्राणरक्षा के लिए भिखारी बनने पर मजबूर है। बूढ़े पिता के डगमगाते कदम अब जवाब दे चुके हैं लेकिन दो-दो बार गला रेते जाने के बाद भी यह जीवट वृद्ध इस उम्मीद में राजधानी पटना की सड़कों पर घिसट रहा है कि शायद उस पर राजसत्ता को तरस आ जाए।ड्ढr ड्ढr कभी बारह बीघे जमीन के मालिक रहे खिद्दी नारायण महतो की यह दशा दबंगों की वजह से हुई है। मंगलवार को इस संवाददाता से बातचीत में खिद्दी और उनके पुत्र ने अपनी जो कहानी सुनाई, वह हैरान कर देने वाली है। मोहिउद्दीनगर, थाना दलसिंहसराय निवासी खिद्दी के पास दो थाना क्षेत्रों में खेती लायक 12 बीघा जमीन थी। करीब एक दशक पहले एक दबंग दारोगी महतोऔर अन्य लोगों की नजर उसकी संपत्ति पर गड़ गयी। उन्होंने पहले धमकाया और जबरन जमीन अपने नाम लिखवाने की चेष्टा की। खिद्दी के इंकार करने पर सोते समय उसका गला रेत दिया गया। 101 टांके लगे। वह ठीक हुआ लेकिन कुछ दिनों बाद फिर गला रेतकर मारने का प्रयास हुआ। ईश्वर की कृपा से वह फिर बच निकले लेकिन तब तक इनका परिवार बुरी तरह दहशतजदा हो चुका था।ड्ढr ड्ढr दबंगों ने इन्हें जमीन व घर से बेदखल कर दिया। खिद्दी ने कई बार प्राथमिकी दर्ज कराई मगर जब स्थानीय थानों ने कोई कार्रवाई नहीं की तो वह पटना आ गये। राजद शासन काल से लेकर अब तक न्याय के लिए दर्जनों बार इन बाप-बेटों ने सफेदपोशों के दरवाजे खटखटाए लेकिन उनकी पीड़ा से कोई नहीं पिघला। बहरहाल, अब दोनों बदनसीब कदमकुआं इलाके में भीख मांगकर किसी तरह समय काट रहे हैं, इस उम्मीद में कि शायद सूबे का वर्तमान शासन उन्हें उनकी संपत्ति वापस दिलाने में कोई मदद करे। इनके मुताबिक जमीन कब्जा करने वालों के डर से इनका पूरा परिवार भी तितर- बितर हो गया है। शिवनारायण के तीन पुत्र भी डर से कई साल से कहीं भागे हुए हैं। वे कहां हैं, कैसे हैं, इन्हें कुछ नहीं मालूम।

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