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‘कानून के तहत फरहान को सजा मिलनी चाहिए’

आतंकी हमले के सिलसिले में गिरफ्तार फरहान अहमद के माता-पिता एक दिन बाद मंगलवार को घर लौट चुके हैं। गंधवारि स्थित अपने घर पर मौजूद पंचायत समिति सदस्य शब्बीर अहमद ने बताया कि वे अपनी पत्नी का इलाज कराने दरभंगा डॉ. आर. मिश्रा के पास गये हुए थे। उत्तर प्रदेश के रामपुर सीआरपीएफ कैम्प पर आतंकी हमले के सिलसिले में हुई पुत्र की गिरफ्तारी के बारे में उन्होंने कहा कि वे इस घटना से शर्मिन्दा हैं।ड्ढr ड्ढr फरहान उर्फ सबाउद्दीन अहमद को देश के कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए क्यांेकि उसने देश एवं खुद अपने खानदान की इज्जत के साथ खिलवाड़ किया है। रहिका पंचायत समिति सदस्य मो. शब्बीर ने कहा कि इज्जत से बड़ी औलाद नहीं होती है। उन्हांेने कहा कि रविवार की रात सकरी एवं पण्डौल की थाना पुलिस अचानक पहुंची और उनसे बड़े बेटे के बारे में ब्योरा लिया। पुलिस ने सूचना दी कि उसका पुत्र आतंकी गतिविधियों में गिरफ्तार कर लिया गया है। यह खबर सुन उसकी पत्नी शगुफ्ता बानो बेहोश हो गयीं। रात में खुद दवा दी और सुबह उसे लेकर दरभंगा चले गये। तबीयत ठीक होने पर सपरिवार मंगलवार को वापस गांव पहुंचे है। मो. शब्बीर कहते हैं कि वे जमीन बेच बेटे को तालीम दे रहे थे और कभी नहीं सोचा था कि उसका बेटा आतंकी निकलेगा।ड्ढr ड्ढr शब्बीर के अनुसार उसकी शादी हाजीपुर के बेला आदम गांव में हुई है। पत्नी बी.ए. है। ससुर मो. मोहसिन दरभंगा मुस्लिम उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक रह चुके हैं जबकि बच्चों ने कमतौल के निकट कुम्हरौली स्थित दीदी एवं मौसी के यहां रहकर तालीम हासिल की है। बड़ी बेटी फरीदा एरम की शादी बेनीबाद बाजार मंे रफी जफर से की है।ड्ढr ड्ढr नामी-गिरामी खानदान का है फरहानड्ढr जाले (दरभंगा) (ए.सं.)। मधुबनी जिला के सकरी थानान्तर्गत गंधवारि गांव में सम्पन्न किसान और समाजसेवी कबीर अहमद के घर जब प्रथम पोते के रूप में सबाउद्दीन ने जन्म लिया था तो खानदान का वारिस आ जाने की खुशी में उनका परिवार झूम उठा थ। कबीर ने अपने पुत्र शब्बीर अहमद को गंधवारि में रखकर अच्छी तालीम देने की कोशिश की। वह ग्रेजुएट भी हुआ, मगर कबीर इस पढ़ाई से खुश नहीं हुए। यही वजह है कि अच्छी तालीम के लिए मशहूर कमतौल में पढ़ाने की नीयत से दादा के इच्छानुसार सबाउद्दीन का कमतौल थाना क्षेत्र के कुम्हरौली गांव स्थित मदरसा अलहोदा एकेडमी में वर्ष 1में द्वितीय कक्षा में नामांकन करवाया गया। कुम्हरौली गांव मे सबाउद्दीन की फुआ और मौसी, दोनों ब्याही हुई थीं। उसके फूफा का नाम काजी मुमताजुल हक और मौसा का नाम मो. जफर मोनाफ जिलानी है। उसके नाना स्व. मो. मोहसिन दरभंगा शफी मुस्लिम हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक रह चुके हैं। वे वैशाली जिलान्तर्गत बेलाआदम गांव के रहनेवाले थे।ड्ढr ड्ढr एक केन्द्रीय मंत्री उसके मौसेरे भाई डा. लतीफ जफर जिलाने के ममिया ससुर हैं। सबाउद्दीन का असली नाम सबाहुद्दीन अहमद और पिता का नाम शब्बीर अहमद है। उसने 23 मार्च 1ो कमतौल जेएन हाई स्कूल में वर्ग आठ में बगैर किसी टीसी के विभागीय नियमानुसार जांच परीक्षा पास कर नामांकन कराया था। नामांकन पंजी में उसकी जन्मतिथि 27 जनवरी 1अंकित है। वर्ग आठ से दस तक उसने नियमित रूप से इस विद्यालय में पढ़ाई की। वर्ष 1में बोर्ड की वार्षिक परीक्षा में वह द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुआ था।

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