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जेपी की जन्मस्थली को बचाने की परियोजना अधर में

संपूर्ण क्रांति के प्रणेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण के अनुयायी बिहार की राजनीति के शिखर पर लगभग दो दशकों से विराजमान है। बावजूद उनका जन्मस्थल सिताब दियारा गंगा और घाघरा नदियों के कटाव का शिकार प्रतिवर्ष होकर धीरे-धीरे दुनिया के नक्शे से गायब होने की स्थिति में पहुंच रहा है। मालूम हो कि लोकनायक की जन्मस्थली को कटाव से बचाने के लिए वर्ष 2001 में तत्कालीन केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री डा. सी.पी. ठाकुर द्वारा सिताब दियारा का भ्रमण किया गया था।ड्ढr ड्ढr इसके उपरांत गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग द्वारा 24 जुलाई, 01 को कटाव निरोधी कार्यो हेतु तीन करोड़ 26 लाख 5हजार की राशि के खर्च हेतु केन्द्र प्रायोजित योजना के रूप में ‘जयप्रभा सुरक्षा तटबंध निर्माण’ हेतु सहमति प्रदान की गई। उक्त राशि आवंटित भी हो गई। इसके तहत प्रस्तावित तटबंध की कुल लंबाई पांच कि.मी. 150 मीटर निर्धारित है। इसमें तीन कि.मी. दो सौ मीटर बिहार में तथा दोनों छोरों के शेष हिस्से क्रमश: 1125 मीटर तथा 825 मीटर उत्तर प्रदेश में हैं। नौंवी पंचवर्षीय योजना में प्रस्तावित इस तटबंध के निर्माण हेतु पहले बिहार तथा उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों में राज्यांश के रूप में17 लाख 84 हजार रुपए की अंतर राशि के कथित विवाद में यह परियोजना वर्षो से फंसी रही। बिहार सरकार सुरक्षा तटबंध से लाभान्वित क्षेत्रफल के आधार पर बचाव के लिए यूपी सरकार को राशि देने को कह रही थी, जबकि यूपी सरकार आबादी के आधार पर राशि देना चाहती थी। हालांकि गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष द्वारा दोनों राज्यों के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर उक्त मामले को सुलझाया गया।ड्ढr ड्ढr तब इस तटबंध के निर्माण की 24 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के मामले को लटकाए रखा गया। बाद में वर्ष 2006 में गंडक योजना के विशेष भूअर्जन पदाधिकारी द्वारा भूअर्जन कर संबंधित भूधारियों के भुगतान हेतु 30 लाख 28 हजार 660 रुपए की राशि जल संसाधन विभाग, पटना से मांग की गई, परन्तु निधि नहीं दी गई। फलत: यह कार्य फंसा रहा। बाद में जयप्रभा स्मारक ट्रस्ट, सिताब दियारा के सचिव रामबहादुर सिंह ने इस मामले को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दरबार में फरवरी, 07 में पहुंचाया। तब मुख्यमंत्री द्वारा इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पदाधिकारियों को कार्य में तेजी लाकर सुरक्षा तटबंध का निर्माण कराने का निर्देश दिया गया, परन्तु करीब एक वर्ष बाद भी जलसंसाधन विभाग ने निधि उपलब्ध नहीं कराई। फलत: यह महत्वपूर्ण योजना टीएसी तथा एसआरसी में भी शामिल नहीं हो सकी है।ं

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