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जीएम फसलों से रोक हटाई

सुप्रीम कोर्ट ने उच्चाधिकार प्राप्त जिनेटिक इंजीनियरिंग एडवाइजरी कमिटी (जीइएसी) को भारत में जीन में परिवर्तन द्वारा परिवर्धित (जेनेटीकली मोडीफाइड) फसलों पर अनुसंधान और खेतों में उनके परीक्षण की अर्जियों पर विचार करने की अनुमति दे दी है। लेकिन न्यायालय ने इस समिति में डा. एम. एस. स्वामीनाथन और डा. पी. एन. भार्गव को विशेष आमंत्रित सदस्यों के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया है, जिससे परीक्षण की अनुमति देने की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता बरती जा सके। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति के. जी. बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने बुधवार को सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि हमारे सामने सवाल है कि देश में लोगों को भूख से मरने दिया जाये या भूख से निपटने के लिए जेनेटीकली मोडीफाइड टेकनोलॉजी अपनाने की अनुमति दी जाये। न्यायाधीशों ने जेनेटीकली मोडीफाइड फसलों के खिलाफ अभियान छेड़े सुश्री अरुणा रोड्रिग्स और गैर सरकारी संगठन जीन कैम्पेन की याचिकाआें पर करीब तीन घंटे की मैराथन सुनवाई के बाद अपना आदेश सुनाया। सुनवाई के दौरान वकील प्रशांत भूषण ने सरकार के रवैये की तीखी आलोचना की, लेकिन इसी बीच वह न्यायाधीशों के तीखे सवालों से बेहद विचलित भी हुए। न्यायाधीशों ने प्रशांत भूषण को आगाह किया कि इस तरह से आपा खोकर वह विचाराधीन मामले में सहयोग नहीं कर रहे हैं।

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