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फॉर्म में वापसी को बेकरार युवी

बात बॉलीवुड स्टार के साथ उनके चर्चे की हो या फिर उनकी बल्लेबाजी की, युवराज सिंह को अपनी मां का साथ हमेशा मिलता रहा है। युवराज अपने बुरे वक्त को जल्दी खत्म करने की हरसंभव कोशिश में लगे हैं। भारत के क्रिकेटरों की अगली जेनरेशन के प्रिंस युवराज ने शायद अपने करियर में इतना बुरा वक्त पहले कभी न देखा हो। युवराज की मां शबनम पिछले आठ दिन से ऑस्ट्रेलिया में उनके साथ हैं। वे शायद उनका 200वां मैच देखने के लिए वहां मौजूद न हों। 1नवम्बर को श्रीलंका के साथ होने वाले मैच युवी के वनडे करियर का 200वां मैच होगा। हो सकता है यही मैच युवराज के जश्न का कारण बन जाए। पिछली पांच टेस्ट पारियों में इस खब्बू बल्लेबाज ने 2, 0, 5, 12, 0 रन बनाए हैं। वनडे में उनका बल्ला अब तक चमक नहीं बिखेर नहीं सका। तीन वनडे में उन्होंने 2, 3 और 6 रन ही बनाए हैं। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अब तक उन्होंने कुल मिलाकर 100 गेंदों का भी सामना नहीं किया है। उनके लगातार फेल होने से सब सकते में हैं। खुद वह भी यह नहीं समझ पा रहे कि उनका हर दूसरा शॉट हवा में क्यों चला जाता है। इस सीरीज में युवराज ज्यादातर शॉर्ट एक्स्ट्रा कवर या शॉर्ट मिडविकेट पर कैच आउट हो रहे हैं। अब उन्हें भी एक सलाह मिल गया है। यह सलाहकार कोई और नहीं बल्कि खुद सचिन तेंदुलकर हैं। तेंदुलकर ने युवराज को सलाह दी है कि वे अपने बैट की ऊपरी ग्रिप को घुमा कर पकड़ने की सलाह दी है। इससे उन्हें ऊपर वाले हाथ को अच्छी तरह से कंट्रोल कर सकेंगे और शॉट हवा में नहीं जाएंगे। यह एक अनुभवी क्रिकेटर की बहुत ही समझबुझ भरी सलाह है। तेंदुलकर जैसा महान क्रिकेटर ही इस तरह की सलाह किसी को दे सकता है। देखने में आया है कि बैटिंग के लिए तैयार होते समय युवराज का दायां कंधा थोड़ा ढीला पड़ जाता है। तेंदुलकर के विचार में ऐसा इसलिए होता है कि बल्लेबाज को ऐसा लगता है जैसे हर गेंद बाउंसर होगी जो कि सीधा उन पर ही प्रहार करेगी। यही कारण है कि गेंदबाज शॉर्ट-पिट गेंदें फेंक कर युवराज को बैकफुट पर जाने को मजबूर कर देते हैं। देखने में यह भी आया है कि वे फ्रंट फुट पर आने में थोड़ा समय लगाते हैं। इतना ही नहीं ड्राइव लगाते समय कभी-कभी वे पूरी तरह से कंट्रोल में नहीं होते। मास्टर ब्लास्टर चाहते हैं कि युवराज अपनी इस कमी को जल्द दूर कर लें। सचिन का मानना है कि युवराज को बाउंसरों पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए। उन्हें खुद पर भरोसा करना चाहिए। वे इन्हें अच्छी तरह से टैकल करने में सक्षम हैं। तेंदुलकर ने युवराज को उनके करियर की सबसे अहम पारी याद दिलाई। यह दक्षिण अफ्रीका में खेले गए 20-20 विश्व कप की बात है। युवराज ने एक ही ओवर में छह छक्के लगाए थे। खास बात यह है कि इनमें सिर्फ अंतिम छह को छोड़ कर सभी फ्रंट फुट पर खेलते हुए लगाए थे। उनकी यह पारी उपमहाद्वीप की पिच पर नहीं खेली गई थी। यह किंग्समीड, डरबन की विकेट थी और सामने थे फ्रंटलाइन इंटरनेशनल तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड। इस टूर में तेंदुलकर उन्हें पहली भी सलाह दे चुके हैं। लेकिन युवराज को उस सलाह को फॉलो करने का समय ही नहीं मिला। तेंदुलकर चाहते थे कि वे नेट्स में ज्यादा से ज्यादा गेंदबाजी करें ताकी उन्हें ऑस्ट्रेलिया की विकेटों की तेजी का अंदाजा हो सके। लेकिन पर्थ में लगी घुटने की चोट के चलते वे प्रैक्िटस में ज्यादा हिस्सा ही नहीं ले सके। एडिलेड मुकाबले से पहले खुद को रिलेक्स करने के लिए युवराज ‘पार्टनर’ और ‘हल्ला बोल’ जैसी फिल्में देख रहे हैं।

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  • Web Title: फॉर्म में वापसी को बेकरार युवी