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डाक्टरों ने दिए नरमी के संकेत

सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था को 21 फरवरी से ठप करने पर आमादा सूबे के डाक्टरों ने नरमी के संकेत दिये हैं। बिहार राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ ने हड़ताल को टालने के लिए स्वास्थ्य विभाग के सचिव से अनिश्चितकालीन हड़ताल के पूर्व आधिकारिक वार्ता की अंतिम पेशकश की है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि डाक्टरों की जिन मांगों को वह नहीं मान रही उसका कारण सार्वजनिक करे। सिर्फ यह वक्तव्य नहीं दे कि डाक्टरों की मांगों पर कार्रवाई करने को सरकार तैयार है। किन-किन मांगों को सरकार मान रही है और संघ की किन-किन मांगों से सरकार सहमत नहीं है यह तुरंत लिखित रूप से सार्वजनिक करे। साथ ही संघ ने विभागीय सचिव को यह बता दिया है कि प्राइवेट प्रैक्िटस बंदी भत्ता लागू करने की तिथि से प्राइवेट प्रैक्िटस न करने का शपथपत्र देने को वह तैयार है।ड्ढr ड्ढr राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ के प्रवक्ता डा. रंजीत कुमार ने कहा कि सरकार को केन्द्रीय कर्मियों के समान अधिसूचित वेतनमान एवं अन्य सेवा शर्ते 1.1.1से सूबे के डाक्टरों को भी देना ही पड़ेगा। राज्य के अन्य कर्मियों को ये सुविधाएं 1.1.1से मिल रही हैं तो डाक्टरों के साथ सरकार भेदभाव क्यों कर रही है। राज्य सरकार के संकल्प के मुताबिक वह सूबे के चिकित्सकों को केन्द्रीय वेतनमान एवं अन्य सेवा शर्ते वैचारिक रूप से 1.1. से देने को बाध्य है। इधर स्वास्थ्य मंत्री चन्द्रमोहन राय ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि सूबे के डाक्टरों को केन्द्रीय वेतनमान के साथ सारी सुविधाएं उस तिथि से दी जाएंगी जब चिकित्सकों से प्राइवेट प्रैक्िटस नहीं करने का शपथ पत्र प्राप्त हो जाएगा। डा. रंजीत ने कहा कि प्राइवेट प्रैक्िटस बंद करने का संबंध सिर्फ प्राइवेट प्रैक्िटस बंदी भत्ता से जुड़ा मामला है, केन्द्रीय वेतनमान से इसका कोई संबंध नहीं है।ं

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