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मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए मांगी ज्यादा मदद

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बजट में मदरसों और इस्लामी शिक्षा के पारम्परिक स्कूलों के आधुनिकीकरण के लिए ज्यादा धन उपलब्ध कराने की मांग की है। वर्ष 2008-0े लिए प्रस्तावित अस्थाई आवंटन पर असहमति जताते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री अजरुन सिंह ने योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया को पत्र लिखा है। पत्र में गत वर्ष के 55 करोड़ के स्थान पर मात्र 65 करोड़ दिए जाने को अपर्याप्त बताया गया है। पत्र के मुताबिक देश में इस समय करीब 12,000 मदरसे हैं। इनके सुधार के लिए 750 करोड़ मांगे गए थे परन्तु 11वीं योजना अवधि के लिए मात्र 350 करोड़ की प्रस्तावित राशि से इस काम में सरकार को परेशानी आएगी। गत वर्ष के आवंटन पर भाजपा ने सरकार पर कम्यूनल बजटिंग का आरोप लगाया था। लेकिन चुनावी आहट से चेते कई मंत्रालय ज्यादा बजट का मांग कर रहे हैं। एक तरफ जहां भाजपा की ओर से विरोध हो सकता है वहीं इस समुदाय के नुमाइंदे मदरसों में सुधारों को लेकर काफी उत्साहित हैं। वजह, सरकार से सहायता प्राप्त मदरसों के उलेमा को ज्यादा वेतन मिलता है वहीं पाठय़क्रम समान होने से उनकी डिग्रियां अन्य विश्वविद्यालय आसानी से स्वीकार कर लेते हैं। फिर भी इस समुदाय में कुछ विरोध करने वाले यह कहते हैं कि ऐसा करने से इस पारम्परिक शिक्षा पद्धति पर धीरे-धीरे सरकारी नियंत्रण हो सकता है।

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