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क्रिकेटरों को बनना होगा जेंटलमैन

भारतीय टीम के खिलाफ खेलने वाली टीमों के लिए खुशखबरी है। विपक्षी खिलाड़ी कितनी भी स्लेजिंग करें, भारतीय क्रिकेटर मुंहतोड़ जवाब देने के बजाए अब मैदान में जेंटलमैन बने रहेंगे। ऐसा वे अपनी मर्जी से नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड के निर्देश पर करेंगे। मार्च-अप्रैल में दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में अगर भारतीय क्रिकेटरों की आक्रामकता गायब रहे तो आश्चर्य मत कीजिएगा। क्योंकि सिडनी टेस्ट के विवाद से सबक लेते हुए भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने क्रिकेट को -जेंटलमैन्स गेम- बनाए रखने की मुहिम अपने घर से शुरू करना तय किया है। इसके लिए - ईंट का जवाब पत्थर से देने- का उद्घोष करने वाले खिलाड़ियों को बोर्ड की तरफ से सख्त लहजे में चेतावनी दी गई है कि उन्हें मैदान में जेंटलमैन की तरह व्यवहार करना होगा। हरभजन सिंह से बेहद नाराज बीसीसीआई के सचिव निरंजन शाह ने कहा - अगर कोई कुछ कहता भी है तो हमारे खिलाड़ियों को उस पर रिएक्ट करने की जरूरत नहीं है। क्या यह जरूरी है कि एक खिलाड़ी कुछ बोले तो दूसरा भी बोले और इसके बाद हंगामा खड़ा हो जाए। अपने खिलाड़ियों को बचाने में बोर्ड का धन और समय दोनों लगे। शाह ने सिडनी में हुए विवाद पर रोष जताते हुए कहा - हमनें हरभजन का बचाव किया, लेकिन इसमें बीसीसीआई का कितना धन और वक्त बर्बाद हुआ। विवाद के शुरू होने से निपटने तक चंद दिनों में लाखों रुपये खर्च हुए हैं। उन्होंने कहा कि सचिन तेंदुलकर, अनिल कुंबले, राहुल द्रविड़ और सौरभ गांगुली के नाम ऐसे चीजों में क्यों नहीं आते। वे किसी के उकसाने में नहीं आते हैं और खेल पर ध्यान रखते हैं। साठ के दशक में सौराष्ट्र के लिए रणजी ट्रॉफी खेल चुके शाह ने कहा -क्रिकेट में स्लेजिंग होनी ही नहीं चाहिए। यह शुरू से ही एक जेंटलमैन्स गेम है और इसे उसी तरह से खेला जाना चाहिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट को स्लेजिंग से मुक्त करा जेंटलमैन्स गेम की उसकी छवि को बनाए रखने के लिए झंडा बुलंद करने का फैसला किया है। इसके लिए वह विभिन्न क्रिकेट संगठनों से भी अपील करेंगे कि वे अपने खिलाड़ियों को मैदान में जेंटलमैन की तरह से व्यवहार करने को कहें।

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  • Web Title: क्रिकेटरों को बनना होगा जेंटलमैन