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प्रचार की शर्त

राजद के एक नेता हैं। पिछले दिनों बड़ा सम्मेलन कर चर्चा में आए। उनकी इच्छा है कि पार्टी उन्हें हेलीकॉप्टर से प्रचार में उतार। अब यह इच्छा उनकी शर्त बन गई है। पार्टी के छोटे नेता परशान हैं कि नेताजी को हेलीकॉप्टर दिया जाए तो कैसे? हेलीकॉप्टर से प्रचार में तो बड़े साहब के अलावा और किसी के उतरने की संभावना तो है नहीं। उधर नेताजी यह मान बैठे हैं कि बड़े साहब के साथ जाने का मौका मिला तो भीड़ जमा कराने का कुछ तो श्रेय उन्हें मिल ही जाएगा। अगर जाने का मौका नहीं मिला तो बेकार की परशानी से बच जाएंगे और हार का ठीकरा भी दूसरों पर फोड़ेंगे। फिर याद आए ‘वो’ड्ढr हेलीकॉप्टर-हवाई जहाज की जब भी चर्चा होती है भगवा पार्टी में एक कार्यकर्ता शिद्दत से याद आते हैं। चुनाव होने के बाद बड़े तो क्या छोटे नेता भी उन्हें याद नहीं करते। अब जब से लोकसभा चुनाव का बिगुल बजा है, पार्टी के लोग उस कार्यकर्ता को खोज रहे हैं। उन्हें बुलावा भी मिल गया है। हेलीकॉप्टर कहां जाएगा, किस क्षेत्र में उतरगा, कब उतरगा, एक दिन में कहां-कहां जाएगा.. जैसे कई सवालों की गुत्थी वही सुलझाते हैं। अमूमन पार्टी के अन्य लोग इससे भागते हैं। कार्यकर्ता भाई को भी यह खेल बेहद पसंद है। चुनाव आया है तो पार्टी में इस खेल के कैप्टेन के रूप में उन्होंने कमान भी संभाल ली है। इसी वजह से साथी कार्यकर्ता प्यार से उन्हें पार्टी के उड्डयन मंत्री भी बुलाने लगे हैं।ड्ढr पुराने भी ठोक रहे तालड्ढr पुरानी पार्टी के पुराने नेताओं में भी अब चुनाव लड़ने की इच्छा जागृत हो गई है। हो भी क्यों न, लग रहा है कि पार्टी बिहार में संगठन को मजबूत करना चाहती है। पार्टी मजबूत होगी तो प्रदेश पार्टी का कोष भी बढ़ेगा। कोष बढ़ेगा तो नेतागिरी चमकाने के लिए समर्थकों की सद्इच्छा पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। नेताओं को पूरी आशा है कि स्वास्थ्य ठीक रहा तो दो वर्षो बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी कोष के साथ ही अपना कोष बढ़ाने में भी काफी मदद मिलेगी।ं

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  • Web Title: बाकी सब बकवास