DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पप्पू यादव-राजन तिवारी को उम्रकैद

बहुचर्चित माकपा विधायक अजीत सरकार समेत तिहरे हत्याकांड मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने गुरुवार को आरोपित राजद सासंद राजेश रजंन उर्फ पप्पू यादव, पूर्व विधायक राजन तिवारी और अनिल यादव को दोषी पाते हुए तीनों को सश्रम आजीवन कारावास और दस-दस हजार रुपए के अर्थदंड की सजा दी। अर्थदंड नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट द्वारा मामले की सुनवाई त्वरित गति से करने के आदेश के बावजूद सीबीआई की विशेष अदालत में इस हत्याकांड की सुनवाई आठ वषरे तक चली और हत्या के 10 वषरे के बाद फैसला आया।ड्ढr ड्ढr विशेष न्यायाधीश वीरेन्द्र मोहन श्रीवास्तव ने उपलब्ध साक्ष्य और गवाहों के बयान के आधार पर तीनों आरोपितों को दोषी पाया। न्यायाधीश श्रीवास्तव ने सजा सुनाने के बाद दोषी पप्पू यादव को सजा भुगतने के लिए वापस तिहाड़ जेल तथा पूर्व विधायक राजन तिवारी और अनिल यादव को बेउर जेल भेज दिया। विशेष अदालत ने पप्पू यादव को हत्या और हत्या के लिए आपराधिक षडय़ंत्र रचने के आरोप में दोषी पाते हुए भारतीय दंड सहिता की धारा 302 सहपठित 120 के तहत सश्रम आजीवन कारावास और दस हजार रुपए का अर्थदंड की सजा दी। अदालत ने पूर्व विधायक राजन तिवारी को हत्या के लिए सश्रम आजीवन कारावास, हत्या का प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत सात-सात वर्ष का सश्रम कारावास की सजा दी। तीनों सजाएं साथ-साथ चलंेगी। अनिल यादव को हत्या के आरोप में सश्रम आजीवन कारावास की सजा दी गई। इससे पहले सीबीआई की विशेष अदालत में तिहाड़ जेल से लाए गए पप्पू यादव तथा बेउर जेल से राजन तिवारी और अनिल यादव को पेश किया गया। विशेष अदालत ने तीनों आरोपितों को माकपा विधायक अजीत सरकार, उनके ड्राइवर हरेन्द्र शर्मा और कार्यकर्ता अशफाकुल रहमान की हत्या और पुलिस गार्ड रमेश उरांव को गोली मार कर हत्या का प्रयास करने के आरोप में दोषी पाते हुए सजा दी।ड्ढr ड्ढr विदित है कि 14 जून 1ो पूर्णिया के खजांची हाट थाना क्षेत्र के काली फ्लावर मिल के पास अपराधियों ने अत्याधुनिक हथियार से एम्बेस्डर कार में बैठे माकपा विधायक अजीत सरकार पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें उनकी मौत हो गई। गोलीबारी की इस घटना में उनके कार्यकर्ता अशफाकुल रहमान और ड्राइवर हरेन्द्र शर्मा की मौत हो गई थी जबकि पुलिस गार्ड रमेश उरांव बुरी तरह जख्मी हो गया था। पूर्णिया के खजांची हाट थाना में इस हत्याकांड का मामला दर्ज हुआ था जिसके सूचक मृतक अजीत सरकार के भाई कल्याण चंद्र सरकार हैं। बिहार सरकार की अनुशंसा पर सीबीआई ने इस हत्याकांड की जांच 1में शुरू की थी। इस तिहरे हत्याकांड मामले में सीबीआई ने सबसे पहले पूर्व विधायक राजन तिवारी को गिरफ्तार किया और उसके बाद ही इस हत्याकांड का खुलासा हुआ। इसके बाद सीबीआई ने अनिल यादव क ो गिरफ्तार किया। इस हत्याकांड में सीबीआई ने 10 मई 1ो राजद सासंद पप्पू यादव, अमर यादव और हरीश चौधरी को फरार दिखाते हुए राजन तिवारी और अनिल यादव के खिलाफ विशेष आदालत में आरोप पत्र दायर किया। सीबीआई ने अपने अनुसंधान में पाया कि राजद सासंद पप्पू यादव ने राजनीतिक दुश्मनी के चलते माकपा विधायक अजीत सरकार की हत्या का आपराधिक षडयंत्र रचा था। सीबीआई ने इस हत्याकांड मामले में कुल 61 गवाहों को विशेष अदालत में पेश किया था, जिनमें से 23 गवाह अपने बयान से मुकर गए। जिन्हें अदालत ने होस्टाइल घोषित कर दिया। वहीं दूसरी आेर आरोपित राजद सांसद पप्पू यादव और पूर्व विधायक राजन तिवारी ने अपने -अपने बचाव में कुल 27 गवाह पेश किए। हाईकोर्ट के कड़े रुख और उसके आदेश पर जनवरी में इस हत्याकांड की बहस शुरू हुई, जो चार फरवरी तक चली। तिहाड़ में रहेंगे या बिहार में!ड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। सजायाफ्ता सांसद पप्पू यादव तिहाड़ में रखे जाएंगे या फिर बिहार में? यह बड़ा सवाल है। अजीत सरकार हत्याकांड में सीबीआई की विशेष अदालत ने सांसद पप्पू यादव, पूर्व विधायक और बाहुबली राजन तिवारी और अनिल यादव को उम्र कैद की सजा सुनाई है। पप्पू यादव लंबे समय से विचाराधीन कैदी के तौर पर तिहाड़ जेल में बंद थे और सुनवाई के लिए उन्हें गुरुवार को ट्रेन से पटना लाया गया, वहीं राजन तिवारी और अनिल यादव बेउर जेल में रखे गए थे। गुरुवार की सुबह तक विचाराधीन रहे पप्पू यादव, राजन तिवारी और अनिल यादव अब सजाताफ्ता बंदी हैं। हालांकि अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद दिल्ली पुलिस की अभिरक्षा में देर शाम पप्पू यादव को ट्रेन से दिल्ली ले जाया गया। बताया जाता है कि दिल्ली में भी पप्पू यादव के खिलाफ एक मामले की सुनवाई चल रही है। इस लिहाज से भी पप्पू यादव को तिहाड़ भेजे जानी की बात कही जा रही है। पर, भविष्य में उन्हें बिहार की जेलों में रखा जाएगा या फिर तिहाड़ में, अब यह तय होना है। बिहार की जेलों में विवादों में रहे पप्पू यादव को अदालती आदेश के बाद तिहाड़ भेजा गया था। जेल आईजी संदीप पौंडरिक के अनुसार पप्पू यादव तिहाड़ में रहेंगे या बिहार की जेलों में, इसे एक्जामिन किया जाएगा और उसके बाद ही निर्णय लिया जाएगा। वहीं राजन तिवारी और अनिल यादव बेउर में ही रखे जाएंगे या फिर उन्हें बक्सर या भागलपुर भेजा जाएगा, यह भी तय नहीं है।ड्ढr ड्ढr अदालत में फफक पड़े पप्पूड्ढr पटना (हि.टी.)। स्थान-सिविल कोर्ट परिसर स्थित सीबीआई की विशेष अदालत का कक्ष। दिन गुरुवार। समय करीब 12.30 बजे। ‘हुजूर मैं निदर्ोष हूं. मुझे कुछ नहीं मालूम है. मैं परिवार का अकेला लड़का हूं। काफी समय से जेल में हूं। मेरे बच्चों को देखने वाला कोई नहीं है। छोटे-छोटे बच्चे बिलट रहे हैं। छह महीने से परिवार का कोई भी सदस्य जेल में मिलने नहीं आया। मेरी मानसिक स्थिति खराब हो चुकी है। मुझे कई प्रकार के रोग हैं। अपनों को देखने के लिए मेरी आंखें तरस गई हैं। मैं पूरी तरह टूट चुका हूं। मुझ पर रहम कीजिए हुजूर। मैं इस हत्याकांड में शामिल नहीं हूं।’ अदालत के कटघरे में खड़े होकर पप्पू यादव ये गुहार लगाते हुए फूट-फूट कर रो पड़े। आंखों में आंसू लिए पप्पू कहते रहे ‘मुझे जहां भी रखा जाय समुचित इलाज कराया जाये। परिवार के लोगों व बच्चों से मिलने दिया जाये। इस हत्याकांड के बारे में कुछ भी नहीं जानता हूं। मैं दोषी नहीं हूं।’ पप्पू को रोता देख अदालत में मौजूद उनके पिता चन्द्र नारायण यादव भी रो पड़े। हालांकि पप्पू यादव की पत्नी व लोजपा सांसद रंजीता रंजन ने अदालत के फैसले पर कुछ भी प्रतिक्रिया देने से इंकार करते हुए कहा कि ‘मैं इस मामले में चुप ही रहूंगी।’ड्ढr इससे पूर्व करीब 11 बजे सीबीआई के विशेष न्यायाधीश वीरेन्द्र मोहन श्रीवास्तव अदालत कक्ष के अंदर आकर बैठ गये थे। वकीलों के साथ ही आरोपितों के परिजनों व अन्य शुभचिंतकों से कोर्ट परिसर खचाखच भरा था। अभियुक्तों के आने का इंतजार किया जाने लगा। देर होते देख सूचना दी गई। तब तिहाड़ जेल से आये अधिकारियों ने सूचना दी कि पप्पू यादव आ गये हैं और नीचे हैं। उनकी तबियत ठीक नहीं है। वे व्हील चेयर पर हैं और आने में असमर्थ है। इस पर अदालत ने कहा ‘उठा कर लाया जाये। मामले का फैसला होने के कारण उनकी उपस्थिति आवश्यक है।’ थोड़ी देर बाद दिल्ली पुलिस की टीम ने व्हील चेयर समेत पप्पू को कोर्ट के अंदर पहुंचा दिया। करीब 11.40 बजे अंदर पहुंचने पर व्हील चेयर से उठ कर पप्पू ने न्यायाधीश को प्रणाम किया और फिर बैठ गये। कुछ देर बाद अजित सरकार हत्याकांड के अन्य आरोपितों पूर्व विधायक राजन तिवारी और अनिल यादव को भी उसी कटघरे में लाया गया। न्यायाधीश द्वारा फैसला सुनाने के बाद पप्पू 2.30 बजे तक कोर्ट के अंदर ही खामोश बैठे रहे। मानो उन्हें काठ मार गया हो। इस दौरान उनसे मिलने के लिए जद (यू) विधायक मुन्ना शुक्ला समेत कई शुभचिंतक व वकील भी अदालत कक्ष में पहुंचे।ड्ढr ड्ढr बहरहाल बेबसी किसी बाहुबली को कैसे लाचार बना देती है इसका उदाहरण पप्पू यादव दिखे। चर्चित अजित सरकार हत्याकांड के फैसले के लिए दिल्ली के तिहाड़ जेल से पटना लाए गए पप्पू यादव शारीरिक और मानसिक तौर पर बेबस नजर आ रहे थे। सुबह में संम्पूर्ण क्रांति एक्सप्रेस से पटना जंक्शन पर उतरे सांसद को स्टेशन से अदालत तक व्हील चेयर और पुलिसकर्मियों के कंधों का सहारा लेना पड़ा। साढ़े सात बजे सुबह दिल्ली पुलिस की टीम के साथ पटना पहुंचे पप्पू को व्हील चेयर पर बैठाकर पटना जंक्शन स्थित विश्राम गृह ले जाया गया। फिर ग्यारह बजे रेलवे स्टेशन पर ही आए कैदी वैन में उन्हें बिठाकर उसी में उनका व्हील चेयर रखा गया। इस कैदी वैन को सीधे कोर्ट परिसर के पिछवाड़े ले जाया गया जहां से फिर उन्हें व्हील चेयर पर बिठाकर अदालत कक्ष में ले जाया गया।ड्ढr ड्ढr चुनाव नहीं लड़ पाएंगे दोनोंड्ढr पटना (वि.सं.)। उम्र कैद की सजा मिलने के साथ ही सांसद पप्पू यादव और पूर्व विधायक राजन तिवारी अब चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। जेल में रहकर चुनाव लड़ने और जीतने वाले ये नेता तब तक किसी सदन में नहीं पहुंच पाएंगे जबतक ऊपर की अदालत उनकी सजा को रद्द कर पूरी तरह उन्हें निदर्ोष घोषित न कर दे। राज्य के जाने-माने विधिवेत्ताआें का ऐसा मानना है। पटना हाई कोर्ट के वरीय अधिवक्ता कृष्णा प्रसाद सिंह ने बताया कि आर.पी. एक्ट 1ी धारा 8 के तहत सक्षम अदालत से सजा पाए लोग किसी चुनाव में भाग लेने के योग्य नहीं माने जाएंगे। सजायाफ्ता किसी चुनाव में उम्मीदवार ही नहीं हो सकते। बिहार राज्य बार काउंसिल के सदस्य वरीय अधिवक्ता यदुवंश गिरी का मानना है कि हत्याकांड में उम्रकैद की सजा हो जाने के बाद चुनाव लड़ने का रास्ता बंद हो जाता है। कानून ऐसे लोगों को संसद या विधानसभा में जाने की इजाजत नहीं देता। पटना हाई कोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के महामंत्री वरीय अधिवक्ता योगेन्द्र चन्द्र वर्मा ने कहा कि जो लोग अपने को बाहुबली साबित करने के लिए कानून के साथ खिलवाड़ करते हैं वैसे लोगों को अब कानून ने अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। पहले जहां जेल में रहते हुए अभियुक्तों को चुनाव लड़ने का अधिकार होता था उसपर अंकुश लगने लगा है क्योंकि सजा के साथ ही उनका यह अधिकार समाप्त हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट के वरीय अधिवक्ता शम्भू प्रसाद सिंह ने कहा कि हमारा कानून सजायाफ्ता को चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं देता। हां अगर ऊपर की अदालत से सजा को रद्द कर दिया जाता है तो ऐसी स्थिति में वे फिर से चुनाव लड़ सकते हैं लेकिन हमारी न्याय व्यवस्थ इतनी जटिल और देर से न्याय करने वाली है जिसके कारण अदालत से फैसला होने में काफी लम्बा वक्त गुजर जाता है। उल्लेखनीय है कि चुनाव लड़ने से मरहूम हुए आनंद मोहन, अखलाक अहमद, मो. शहाबुद्दीन एवं अन्य लोगों की सूची में अब पप्पु यादव और राजन तिवारी का नाम भी शामिल हो गया है। आने वाले दिनों में कई अन्य चर्चित बाहुबली भी इस कतार में नजर आएंगे।ं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: पप्पू यादव-राजन तिवारी को उम्रकैद