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उम्र 16-17 और ‘खेल’ पति-पत्नी का

अपनी राजधानी भी बदल रही है। इस बदलाव में बच्चों का मिजाज और जीवन के प्रति उनका नजरिया भी शामिल है। इसे साबित किया पिछले पखवारे दो लेस्बियन स्कूली बच्चियों ने। पर्दे के पीछे राज्य में लेस्बियन प्रेम की चाहे जितनी गाथाएं रही हों, लेकिन इस तरह का किस्सा पहली बार सामने आने से लोग आश्चर्यचकित हैं। इस कहानी की नायिकाएं 17 और 16 वर्ष की दो छात्राएं हैं। उन्हें एक- दूसरे का साथ इस कदर भाता था कि दोनों अचानक शहर छोड़कर भाग गयीं। चूंकि दोनों स्कूल परिसर से ही गायब हुई थीं इसलिए इस घटना के बाद पूरा स्कूल सदमे में डूब गया लेकिन स्कूल और बच्चों के परिजनों की बदनामी न हो, इसलिए मामला थाने तक नहीं पहुंचा।ड्ढr फिर, सात- आठ दिन बाद दोनों वापस आ गईं। इस बीच स्कूल प्रशासन ने इनमें से एक का नामांकन रद्द कर दिया। संयोग से वह छात्रा स्कूल की ही एक साइंस टीचर (गणित) की पुत्री थी। अपनी बेटी की करतूत से मां इस कदर शर्मसार हुई कि उसने लोकलाजवश विद्यालय से त्यागपत्र दे दिया। राजधानी के चर्चित गर्ल्स स्कूल में दोनों छात्राआें के बीच एक कक्षा का फासला था। उनके ये ‘संबंध’ पिछले तीन-चार वर्षो से चल रहे थे। कक्षा 11 वीं की मौसम और 10 वीं की सुमन (दोनों काल्पनिक नाम) कब और कैसे एक-दूसरे के करीब आ गयीं, यह तो कोई नहीं जान सका लेकिन गत वर्षो में कई बार इन्हें स्कूल के शौचालय, लैब, लाइब्रेरी, म्यूजिक रूम आदि में छात्राओं व शिक्षिकाओं ने आपत्तिजनक स्थिति में देखा। डांट-फटकार भी लगाई गयी लेकिन उल्टे वे एक- दूसरे और करीब होती गईं।ड्ढr ड्ढr स्कूल सूत्रों के मुताबिक प्रणय सम्बंधों के दौरान में छोटी लड़की सुमन ‘मेल’ जबकि बड़ी मौसम ‘फीमेल’ की भूमिका निभाती थी। इनके सम्बंधों की जानकारी दोनों के अभिभावकों को भी थी। यही वजह है कि जब दोनों अचानक भागीं तो बहुत हो- हंगामा नहीं हुआ। हां, इनकी वापसी के बाद एक की शिक्षका मां ने अपने वर्षो के प्रशिक्षण कैरियर को तिलांजलि अवश्य दे दी। उधर स्कूल प्रशासन ने 11 वीं की छात्रा मौसम को तो स्कूल से निकाल दिया लेकिन 10 वीं की छात्रा सुमन पर इसलिए कार्रवाई नहीं हो सकी क्योंकि वह परीक्षार्थी है। उसका एडमिट कार्ड भी निर्गत हो चुका है। बहरहाल मौसम और सुमन की प्रेम कहानी आगे क्या रूप लेगी, यह तो भविष्य के गर्त में छिपा है लेकिन गर्ल्स स्कूल में इस तरह की घटना होने से अन्य बच्चियों के अभिभावकों की पेशानी पर अब बल पड़ना स्वाभाविक है।ड्ढr ड्ढr जैविक उद्यान व म्यूजियम में उमड़े प्रेमी युगलड्ढr पटना (का.सं. हिप्र)। गुनगुनी धूप। चारांे आेर रंग-बिरंगे फूल व हरे-हरे पेड़। 14 फरवरी का दिन। प्रेमी जोड़ों को और क्या चाहिए। बस पहुंच गए संजय गांधी जैविक उद्यान या पटना संग्रहालय। चिड़ियाखाना में तो सबकुछ ठीकठाक रहा पर संग्रहालय में इनके प्रेम में खलल डालने कुछ सामाजिक कार्यकर्ता भी पहुंच गए। प्रेमालाप में लीन जोड़ों को इन कार्यकर्ताओं ने लेक्चर भी पिलाया। कुछ लड़कों को उठक-बैठक भी करायी गयी। कुछ देर तक अफरातफरी की स्थिति बन गयी। उधर जैविक उद्यान में किसी पेड़ के नीचे अथवा खुले आसमान में बैठ कर घंटांे गपशप का दौर चला। दिल चाहा तो नौका बिहार व शिशु रेल का भी आनंद लिया। शहर के शोरगुल से दूर गुरुवार को काफी संख्या में वेलेन्टाइन डे मनाने के लिए प्रेमी जोड़े उद्यान पहुंचे। यूं तो उद्यान पहुंचने वालों में बच्चे, बूढ़े और जवान सभी शामिल थे, लेकिन प्रेमी जोड़ों की तादाद कुछ अधिक ही थी। गुरुवार को चार हजार लोगों ने उद्यान का भ्रमण किया। शिशु रेल के छह फेरे लगे। उद्यान में सुरक्षा के खास इंतजाम किये गये थे।ड्ढr ड्ढr इधर संग्रहालय में प्रेमी जोड़ों की तादाद तो कम रही पर अखिल भारतीय साईं शाह कमिटी की तस्लीम जमाल जौहरी व उनके समर्थक विरोध जताने हाथों में झंडा -बैनर लिये हुए धमक गए। प्रेमालाप में खलल डालते हुए उन्होंन लड़के व लड़कियों को अच्छी-खासी लेक्चर पिलायी। कुछ जोड़ों के साथ इनकी बकझक भी हुई।ड्ढr ड्ढr लेस्बियन्स को काउंसलिंग की जरूरतड्ढr पटना (व.सं.)। मनोचिकित्सक राजधानी के एक स्कूल में जीएसजी (गर्ल्स सेक्स विथ गर्ल्स) की घटना के सामने आने से अचंभित नहीं है। इस मामले को लेकर मनोचिकित्सक डा. विनय कुमार ने कहा कि लेस्बियनिज्म एक जटिल मामला है।इसके कई कारण हैं। फ्रायड के मुताबिक बचपन में आघात, दुख पहुंचाने वाली किसी घटना या स्मृति इसका मुख्य कारण है। जिन्हें पुरुष से डर लगता है, बच्ची ने अपने पिता का व्यवहार मां के साथ यदि अच्छा नहीं देखा है तो वह किसी पुरुष की बजाय समलिंगी से सम्बंध बनाना उचित समझती है।कुछ के मन में पुरुष के इन्द्रिय की छवि हथियार के रूप में भी अंकित होती है। हमारे सामाजिक, सांस्कृतिक मूल्यों के हिसाब से भी ऐसे सम्बंध सुविधाजनक होते हैं। इनके अलावा समलिंगी सम्बंधों में हार्मोन और हमारी रुचियां भी कारक हैं। इनके मुताबिक लेस्बियन्स के साथ सहानुभूतिपूर्वक समाज को पेश आना चाहिए और उनके पूरे परिवार की काउंसिलिंग होनी चाहिए।ं

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