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खारे पानी में नहीं गलेगी आतंकियों की दाल!

हिन्द महासागरीय देशों के नौसेना अध्यक्षों के यहां दो दिन के सम्मेलन में समुद्र के रास्ते आतंकवाद, तस्करी, समुद्री लुटेरों की समस्याओं से निपटने के साथ ही प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के लिए सामूहिक प्रयास पर बातचीत काफी सफल रही। सम्मेलन के दौरान ‘हिन्दुस्तान’ से अलग से बातचीत में नौसेनाध्यक्ष एडमिरल सुरीश मेहता ने बताया कि भारत समेत 27 देशों के नौसेनाध्यक्षों की अलग से हुई बैठक में कई उपयोगी सुझाव आए हैं। भारत की इस पहल पर कहीं से भी कोई आपत्ति नहीं उठी। तमाम नौसेनाध्यक्षों ने सामूहिक और सभी को साथ ले कर हिन्द महासागर क्षेत्र की समस्याओं से निपटने पर जोर दिया है। एडमिरल मेहता ने बताया कि यह पहल किसी देश के खिलाफ किसी तरह की साझा मुहिम के लिए नहीं बल्कि क्षेत्रीय शांति, स्थिरता, सुरक्षा और आर्थिक तरक्की के लिए की गई है। साझा सहयोग के बल पर आतंकवाद समेत किसी भी चुनौती से निटपने के लिए सभी ने हाथ मिलाए हैं। हिन्द महासागर नौसेना मंच (आईओएनएस) प्रदान कर भारत ने एक पहल की है। गंभीर मंत्रणा के बाद यह तय हुआ है कि हर दो वर्ष बाद यह सम्मेलन आयोजित होगा। सम्मेलन की अध्यक्षता और सचिवालय भी बारी-बारी से बदली जाएगी। एडमिरल मेहता ने कहा कि हमारे पास पड़ोस में आतंकवादियों की शरण स्थलियां बनी हुई हैं। सूत्रों के मुताबिक दक्षेस की तरह कहीं आईओएनएस भी विवादों में न फंसे इसके लिए तमाम अंतरराष्ट्रीय समझौतों जैसे नाटो, आसियान, दक्षेस आदि का अध्ययन किया गया है। साथ ही भाग लेने वाले प्रतिनिधियों को एक दूसरे के संपर्क में रखने के लिए इंटरनेट पर विशेष कोड और पासवर्ड दिए गए ताकि किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले वे अपनी आशंकाओं को आपसी बातचीत के जरिए दूर कर लें। सम्मेलन में हुई सहमतियों को संबंधित सरकारों से मंजूरी के बाद अंतिम चार्टर तैयार किया जाएगा।

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