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बस रूटों के परमिट जारी करने पर हाईकोर्ट की रोक

हाईकोर्ट ने 475 राजमागरे पर निजी बसों को परमिट जारी करने पर 18 फरवरी तक रोक लगा दी है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने 241 बस अड्डों को निजी हाथों में देने केनिर्णय पर भी सरकार से जवाब तलब किया है। इन दोनों ही निर्णय से रोडवेज कर्मियों मंे खुशी की लहर है।ड्ढr हाईकोर्ट में शुक्रवार से 475 राजमागरे पर निजी बसों को परमिट देने की 12 दिसम्बर की अधिसूचना के खिलाफ सुनवाई आरंभ हुई। उप्र. परिवहन निगम अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा की तरफ से दायर याचिका पर न्यायमूर्ति प्रदीप कांत ने बहस पूरी होने से पहले 18 फरवरी तक निजी बसों को परमिट देने के शासन के अधिकार पर रोक लगा दी हैे। उन्होंने यह मौखिक आदेश मोर्चा के अधिवक्ता एस.के.कालिया की अपील पर दिया। इस बारे में श्री कालिया की दलील थी कि अधिसूचना के जवाब मंे सभी आपत्तियों की सुनवाई पूरी हो चुकी है। यदि परमिट पर रोक अस्थाई रोक न लगाई गई तो फिर शासन 16 फरवरी से ही निजी बस ऑपरेटरों को परमिट जारी की प्रक्रिया आरंभ कर सकता है।ड्ढr शुक्रवार को ही हाईकोर्ट में मोर्चा की दूसरी याचिका पर भी सुनवाई हुई। इसमें न्यायमूर्ति प्रदीप कांत ने सरकार से बस अड्डों को निजी हाथों मंे देने के औचित्य पर जवाब तलब किया है। उन्हांेने लाभ दे रहे बस अड्डों का निजी हाथों में देने पर सरकार के नजरिए की निंदा भी की। याचिका पर अगली सुनवाई 21 फरवरी को होगी। मोर्चा के नेता तेज बहादुर सिंह, राकेश सिंह, गिरीश मिश्र, आदि का कहना है कि उनकी सारी उम्मीदें अब हाईकोर्ट पर ही टिकीं हैं। ं

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