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टल सकती है डाक्टरों की हड़ताल

सूबे के डाक्टरों की 21 फरवरी से प्रस्तावित बेमियादी हड़ताल टलने के आसार दिखने लगे हैं। नीतीश सरकार डाक्टरों को डायनेमिक एसीपी देने पर सहमत हो गई है। केन्द्रीय वेतनमान देने के मुद्दे पर भी विचार करने का आश्वासन दिया है। हड़ताल को टालने के लिए शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री चन्द्रमोहन राय एवं बिहार राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ के प्रतिनिधियों के बीच गंभीर वार्ता हुई। स्वास्थ्य मंत्री ने संघ से हड़ताल को टालने की अपील करते हुए कहा कि सरकार अगले वित्तीय वर्ष से डाक्टरों को केन्द्रीय वेतनमान देने पर भी विचार करेगी। इसके अतिरिक्त संघ की सभी आवश्यक मांगों को पूरा करने पर सरकार तत्काल सहमत है। स्वास्थ्य निदेशालय की सुदृढ़ता, राज्य स्वास्थ्य समिति की शक्ित में कमी और वहां से कनीय पदाधिकारियों को हटाकर वरीय पदाधिकारियों की स्थापना, डाक्टरों पर से नौकरशाही की पकड़ कम करना, विशेषज्ञ कैडर की स्थापना, ग्रामीण पदस्थापन में अतिरिक्त भत्ता, आयुष विधा के डाक्टरों को सामान्य डाक्टरों के समकक्ष सुविधाएं, कैडर नियमावली का गठन, प्रमंडलीय स्तर पर थोक स्थानांतरण पर रोक समेत डाक्टरों की कई मांगों पर शीघ्रता से कार्रवाई हो रही है।ड्ढr ड्ढr स्वास्थ्य विभाग में डायेनेमिक एसीपी के मुद्दे पर उच्चस्तरीय सहमति बन गई है। ऐसी परिस्थिति में डाक्टरों के हड़ताल पर जाने का कोई औचित्य नहीं है। उधर स्वास्थ्य संघ के प्रवक्ता डा. रंजीत कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के लिखित आमंत्रण पर संघ से सौहाद्र्रपूर्ण वार्ता हुई। संघ ने विन्दुवार लिखित सहमति पत्र देने का आग्रह किया। 17 फरवरी को संघ की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक के पूर्व सहमति पत्र मिलेगा तो कार्यकारिणी की सहमति से स्वास्थ्य मंत्री से 17 को शाम में फिर वार्ता होगी जिसमें हड़ताल के मुद्दे पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। बैठक में संघ की तरफ से सीपी सिंह, रामनगीना सिंह, दिनेश्वर सिंह, अजय कुमार, रंजीत कुमार के साथ ही कांट्रेक्ट डाक्टरों के प्रतिनिधि महेश पासवान, डेन्टल प्रतिनिधि आरके शुक्ला और आयुष प्रतिनिधि एसएन राय शामिल थे। सर्जरी के 20 में से 13 डाक्टर गायब मिलेड्ढr पटना (हि.प्र.)। पीएमसीएच के सर्जरी विभागाध्यक्ष ने शुक्रवार को विभागीय डॉक्टरों की अचानक खोज-खबर ली तो 13 वरीय चिकित्सक नदारद मिले। विभाग में कुल 20 वरीय चिकित्सकों की डय़ूटी थी। फिर क्या था, उन्होंने पूरी उपस्थिति पंजिका लाल रंग से रंग दी। सभी डॉक्टरों से जवाब-तलब कर कॉलेज के प्राचार्य को इस मामले से अवगत करा दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि विभागाध्यक्ष डा. सुधीर कुमार शुक्रवार को तड़के अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अपने विभाग के सभी चिकित्सकों की तलाश कराई। इनमें 13 डाक्टर पूर्वान्ह दस बजे तक गैरहाजिर मिले। अनुपस्थित पाये गये डाक्टरों में डा. अजीत बहादुर सिंह, डा. आईएस ठाकुर, डा. जेपी गुप्ता, डा. जैनेन्द्र कुमार, डा. रामनरेश यादव, डा. अमरेन्द्र कुमार, डा. वीके पाण्डेय, डा. यूएस सिंह, डा. अजीत सिंह, डा. शैलेश कुमार सिन्हा, डा. एके मालवीय, डा. वीके दास और डा. अशोक कुमार सिंह शामिल हैं। डा. आई.एस.ठाकुर और डा. एन.के.सिंह अवकाश पर हैं। डा. विमल मुकेश कोराष्ट्रपति दौरे की ड्यूटी मिली है। डा. विनोद कुमार पीएल में चल रहे हैं। अनुपस्थित चिकित्सकों का कहना है कि वे सुबह 8.30 बजे अस्पताल आए तो विभागाध्यक्ष का चैम्बर बंद पाया।ड्ढr ड्ढr इन डॉक्टरों ने शुक्रवार को अपनी ड्यूटी की। उनका यह भी कहना था कि राजपत्रित पदाधिकारी को उपस्थिति पंजी पर हस्ताक्षर करने का प्रावधान नहीं है। उनका यह भी आरोप था कि विभागाध्यक्ष को उस सर्जन की तलाश भी करनी चाहिए जो कभी भी अस्पताल में ड्यूटी नहीं करते। इस संबंध में कॉलेज के प्राचार्य डा. आरकेपी सिंह ने कहा कि विभागाध्यक्ष ने स्पष्टीकरण की मांग की है। स्पष्टीकरण आने के बाद मामले पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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