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खेल मंत्रालय और बाई में बैर जारी

जहां एक ओर पूरा देश 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों में लगा है वहीं, लगता है खेल मंत्रालय ने बैडमिंटन के खिलाफ कमर कस ही ली है। हाल ही में शटलकॉक की कमी के चलते बैडमिंटन कैप को रद्द करना पड़ा था जिसके लिए भारतीय बैडिमटन संघ-बाई ने मंत्रालय को दोषी ठहराया। अब मंत्रालय ने बिना कारण बताए चार जूनियर खिलाड़ियों के नाम डच ओपन और जर्मन ओपन खेलने जाने वाली टीम में से काट दिए। बाई के एक वरिष्ठ सूत्र के अनुसार, टीम को 24 फरवरी को जाना है जबकि मंत्रालय ने शुक्रवार को इनके नाम काटने की सूचना बाई को एक पत्र के जरिए दी। खिलाड़ियों ने कड़ी मेहनत की है और टूर्नामेंट के लिए पूरी तरह तैयार हैं। डच ओपन 27 फरवरी से 2 मार्च तक हॉलैंड के हारलेम में और जर्मन ओपन चैंपियनशिप 6 से मार्च तक जर्मनी के बॉटरॉप में होनी है। सूत्र के अनुसार, कुल 10 खिलाड़ियों-पांच लड़के और पांच लड़कियों को इन जूनियर टूर्नामेंटों में हिस्सा लेने के लिए जाना था। इनमें से चार खिलाड़ियों-साई प्रणीत, प्रणव चोपड़ा, प्रदन्या गाद्रे, और श्वेता केलकर के नाम मंत्रालय ने काट दिए। इसका असर भारतीय दल के प्रदर्शन पर भी पड़ेगा क्योंकि अब सिर्फ छह खिलाड़ी ही जाएंगे। जिन खिलाड़ियों के नाम काटे गए, उन्होंने इन टूर्नामेंटों के चलते अपनी पढ़ाई की भी तैयारी नहीं की है। अब ये न तो ये खेल सकेंगे और न ही ठीक से परीक्षा दे सकने की स्थिति में हैं। इस मामले पर खेल मंत्रालय में सचिव एस. के. अरोड़ा से संपर्क करने की कोशिश नाकाम रही। लेकिन एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, मुझे हालांकि इसके बारे में कोई जानकारी नहीं लेकिन जब भी मंत्रालय किन्हीं खिलाड़ियों को रोकता है तो वह सिर्फ फाइनेंस के कारण ही। अन्यथा कोई कारण नहीं कि खिलाड़ियों को रोका जाए, प्रशासनिक स्तर पर हम सबको क्लीयरेंस दे देते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर उन्हें रोका गया है तो वे फिजिकली खुद जा सकते हैं (अपने या बाई के खर्चे पर)। मामला बाद में देख लिया जाएगा। वैसे अभी वक्त है और इस बारे में बाई अध्यक्ष वी के वर्मा मंगलवार को बात कर सकते हैं। दूसरी ओर इस बारे में बाई सचिव एलसी गुप्ता ने इनकार करते हुए कहा कि हम अपने खर्चे पर खिलाड़ियों को नहीं भेजेंगे। बाई सूत्र के अनुसार, ऐसा नजर आ रहा है कि बाई के साथ खेल मंत्रालय (या इसके किसी वरिष्ठ अधिकारी) का कोई निजी विवाद है। न जाने मंत्रालय बाई से किस बात का बदला ले रहा है, लेकिन आपसी मतभेदों के चलते उन खिलाड़ियों का करियर तबाह नहीं करना चाहिए, जिनमें काफी प्रतिभा है और जो आने वाले वक्त में देश का नाम रोशन कर सकते हैं।

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