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पीजीआई में स्टेम सेल से बनेगा दिल का वाल्व

संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में स्टेम सेल तकनीक से मानव दिल का वाल्व विकसित होगा। इसके लिए जापान के सपेरो मेडिकल यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। यहाँ के कार्डियोवैसकुलर थोरेसिक सर्जरी विभाग की प्रयोगशाला में इस पर परीक्षण भी शुरू हो गया है।ड्ढr यह स्टेम सेल मानव की अस्थि मज्जा यानी बोन मैरो से ली गई है। दुनिया में इस तरह का पहला शोध होने का दावा किया जा रहा है। नए अनुसंधान से उत्साहित चिकित्सकों का कहना है कि अगर उनकी योजना सफल रही तो कृत्रिम वाल्व का दौर खत्म हो जाएगा। जापान व अमेरिका के बाद मानव दिल के हिस्से को विकसित करने पर शोध करने वाला, भारत दुनिया का तीसरा देश बन गया है। सीवीटीएस विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एसके अग्रवाल ने बताया कि स्टेम सेल से दिल का वाल्व बनाया जा सकता है। क्योंकि उन कोशिकाआें में शरीर के किसी भी अंग की कोशिकाएँ विकसित करने की क्षमता होती है। उनका कहना है कि अभी तक पशुआें की त्वचा से विकसित वाल्व या मेटेलिक वाल्व का ही प्रयोग किया जा रहा है। इसके कुछ नुकसान भी हैं। उनके खराब होने की भी संभावना रहती है। प्रो. अग्रवाल का कहना है कि चूँकि स्टेम सेल से विकसित होने वाला वाल्व मानव की कोशिकाआें से विकसित होगा। इसलिए इसमें शरीर पर विपरीत असर पड़ने की संभावना नहीं रहेगी। जापान के सपोरो मेडिकल यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने स्टेम सेल से चूहे का दिल विकसित करने में सफलता पाई है।

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  • Web Title: पीजीआई में स्टेम सेल से बनेगा दिल का वाल्व