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बिहारियों ने स्थापित की थी श्रम मर्यादा

बिहार से दो लाख से अधिक लोग मारीशस गए थे। चार-पांच आना प्रतिदिन की कमाई पर जीवन यापन के लिए घर से दूर, समुद्र पार निकल जाने वाले बिहारी श्रमिकों ने वहां श्रम की मर्यादा स्थापित की। जहाज से सफर करते हुए मारीशस पहुंचे भारतीय कैदियों ने यहां सड़कों का निर्माण किया। बिहार और देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचने वाले श्रमिक प्रताड़ित होते थे। अभावों के मारे इन श्रमिकों को मारीशस, गुयाना और जमैका में गुलामों की तरह रहने को मजबूर किया जाता था।ड्ढr ड्ढr बिहार के शाहाबाद जिले के बिहियां के रहने वाले रामगुलाम भी कोलकाता के बंदरगाह से ‘हिन्दुस्तान’ नामक शिप से रवाना हुए थे। रामगुलाम 1871 में कोलकाता बंदरगाह से रवाना हुए थे। हरिगांव के रहने वाले रामगुलाम जिस साल मारीशस रवाना हुए उस साल शाहाबाद से मारीशस जाने वाले लोगों की तादाद सर्वाधिक थी। मारीशस जाने वाले श्रमिकों में आरा, गया, छपरा गाजीपुर से जाने वाले लोगों की संख्या अधिक थी। मजदूरों से शत्तर्बंदी प्रथा के तहत पांच साल के कांट्रेक्ट पर हस्ताक्षर कराया जाता था। आने-जाने का खर्च वहन कम्पनी करती थी। शर्त तो ऐसी होती थी , जिसे कभी पूरा नहीं किया जाता था। हालांकि दास प्रथा 1835 में समाप्त कर दी गई थी पर व्यवहार में भारत से जाने वाले श्रमिक अद्ध्र्रदास की तरह थे। उनसे गुलामों सा काम लिया जाता था। तंग कोठरियों में रखा जाता था। पंद्रह-पंद्रह घंटे तक उन्हें काम करना पड़ता था। कांट्रेक्ट समाप्त होने पर उनके भेजने की व्यवस्था नहीं की जाती थी। ऐसे में मजदूर वहीं रहने को विवश हो जाते थे। उन्हें झूठे मुकदमों में फंसा दिया जाता था। मारा-पीटा जाता था। अनेक लोग आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाते थे।ड्ढr ड्ढr बिहार से कितने गएड्ढr मारीशस जाने वाले श्रमिकों की संख्या के बारे में कोलकाता में पदस्थापित तात्कालीन इमीग्रेशन प्रोटेक्टर जे.जी ग्रांट ने 6 अक्तूबर, 186ो बंगाल सरकार के कनीय सचिव ए.मैकेंजी को जानकारी दी थी। आंकड़ों को देखकर यह सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि बड़ी संख्या में लोग मारीशस गए थे। 1872-73 और 1873-74 में कोलकाता बंदरगाह से कॉलोनियों में जाने वाले लोगों की वर्ग और जाति का अनुपात निम्न था- हिंदू -351 ब्राह्मण-5672, कृषक- 11533, आर्टिजियन-3407, निचली जातियां- 84587, मुस्लिम-6577 तथा क्रिश्चियन-चार। यों सबसे पहले 1815 से 182े बीच बंगाल प्रसिडेंसी से करीब 1014 सजायाफ्ता कैदी चीनी उत्पादक कॉलोनियों में भेजे गए थे।ड्ढr बिहार से लाखों की संख्या में पलायन के संबंध में बिहार से जुड़ा एक अध्ययन बताता है कि 1842 से 1870 के बीच 5,53,5मजदूर चीनी उत्पादक कॉलोनियों में गए। इनमें बिहार से कुल 1,08,156 लोग मारीशस, 24681 गुयाअना, 11287 त्रिनिदाद और 44व्यक्ित जमैका गए।ड्ढr ड्ढr ब्रिटिश गुयाना की 1871 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार भरतीयों की संख्या-48363,स्थानीय-लोगों की संख्या-1,03,1चीनी नागरिकों की संख्या-6,880, पुर्तगाली 12,02वेस्टइंडीज- 13,385 तथा अन्य लोगों की संख्या थी। डेमरारा में भारतीय श्रमिकों की संख्या 68,302 थी। इसमें हिन्दू 44,883,मुसलमान 11,007,आदिवासी 1067 और क्रिश्चियन केवल 28 थे। मारीशस में 186में भारतीय लोगों की संख्या 206771 थी यह 1870 में बढ़कर 2,10,636 हो गई थी। प्रोटेक्टर इमीग्रेशन की बारहवीं रिपोर्ट के अनुसार 1871 तक मारीशस 2,10,5भारतीय श्रमिक मारीशस गए थे। इनमें महिलाआें की संख्या 70,353 थी। बिहार से 1871-72 में मारीशस जाने वाले लोगों की संख्या पर नजर दिलचस्प होगा। जहाजों के नामड्ढr जिला आलमगीर निमरोड हार्डवे हिन्दुस्तान आलमगीर निमरोड फतेहसलाम आलमगीर निमरोड फतेहसलाम कुलड्ढr शाहाबाद74 66 80 73 65 70 71 75701ड्ढr सारण 3728 22 21 6 17 6 181424 1ड्ढr मुंगेर4 3 1 10 11 5 1 134 153ड्ढr मुजफ्फरपुर11 8 18 6 14 7 100ड्ढr पटना414824 40 16 3326 36 227 2गया1 40 63 44 55 37 37 22 10 10337ड्ढr पूर्णिया2 2 - - - - - --- 4ड्ढr (जे.जी.ग्रांट की रिपोर्ट फोर्ट विलियम, 15 जून 1872)ड्ढr ड्ढr बिहार से मारीशस जाने वाले लोगों की संख्या 1870-72 में 125थी। इसमें उत्तर पूर्वी राज्यों से लोग गए थे। इसमें बिहार से 3412 व्यक्ित और बंगाल के जिलों से व्यक्ित शामिल थे। इमीग्रेशन की 1873 की रिपोर्ट के अनुसार ब्राह्मण-2521, कृषक जातियां-4आर्टिजन-1537, निचली जाति-530मुस्लिम-20 तथा क्रिश्चियन-8 थे।

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  • Web Title: बिहारियों ने स्थापित की थी श्रम मर्यादा