DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मैदान में खेमेबंदी

इंडियन प्रीमियर लीग के पहला कदम रखने से पहले ही आस्ट्रेलिया क्रिकेट के पैर डगमगाने लगे हैं। बीसीसीआई का नवजात शिशु ‘आईपीएल’ स्थापित मानकों को ध्वस्त करने पर उतारू है। अप्रैल से शुरू होने वाली 20-20 आेवर की इस प्रतियोगिता के बारे में कहा जा रहा है कि यह विश्व क्रिकेट का मौजूदा स्वरूप बदल देगी। टूर्नामेंट के उद्गम से रुपए-पैसे की नदियां निकल रही हैं जिनमें स्नान करने को खिलाड़ी, प्रायोजक, आयोजक सभी आतुर हैं। आईपीएल का कार्यक्रम आस्ट्रेलिया के अंतरराष्ट्रीय दौरे से टकरा रहा है। फिर भी विश्व चैंपियन टीम के कई सितारे देश के बजाए आईपीएल की वर्दी पहनने पर आमादा हैं। कायदे से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के तय दौरों पर जाना प्रत्येक देश की जिम्मेदारी है, पर पैसे के लालच में अनेक बड़े खिलाड़ी बगावत पर उतारू हैं। धन की इस लूट में कोई अपना हक खोने को तैयार नहीं है। आईपीएल के कारण आईसीसी, प्रायोजक और भारत में राज्य क्रिकेट एसोसिएशन परेशान हैं। अभी तो किसी की समझ में नहीं आ रहा है कि सिरा कैसे बैठाया जाए? क्रिकेट आस्ट्रेलिया का जिन प्रायोजकों से अनुबंध है वे नहीं चाहते कि चैंपियन टीम के खिलाड़ी आईपीएल में खेलने के दौरान प्रतिद्वंद्वी कम्पनियों के लिए विज्ञापन करें। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (सीएबी) जैसी संस्थाआें की परेशानी अलग है। कहने को आईपीएल का नियंत्रण बीसीसीआई के आधीन है किन्तु उसके मैचों की टिकट बिक्री के नियम भिन्न बनाए जा रहे हैं। इन नियमों से टकराव की नौबत आ गई है। आईसीसी ने कपिल देव के नेतृत्व वाली इंडियन क्रिकेट लीग (आईसीएल) को मान्यता देने से इंकार कर दिया लेकिन आईपीएल के बढ़ते प्रभाव से अब वह भी भयभीत है। आईसीसी के अम्पायर आईपीएल की ड्यूटी बजाने को आतुर हैं। बीसीसीआई अपनी धनशक्ित से क्रिकेट की नई इबारत लिख रही है। इस इबारत के नैतिक-अनैतिक पक्ष को लेकर बहस तो की जा सकती है, लेकिन इसे बदलना फिलहाल असंभव है। क्रिकेट के खेल पर पैसा पूरी तरह हावी हो चुका है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: मैदान में खेमेबंदी