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अब चैनलों के खबरची बनेंगे मशीनी कबूतर

जल्द ही आकाश में इलेक्ट्रॉनिक कबूतर नजर आएंगे। बाबा आदम के जमाने वाले असली कबूतरों की तरह यह उड़ती मशीनें भी खबरें और संदेश पहुंचाने का काम करेंगी। इन्हें आप और हम मानव रहित विमान उर्फ यूएवी के नाम से जानेंगे। आने वाले दौर में चैनलों की ‘एक्सक्लूसिव फुटेज’ और ‘सबसे पहले’ की भूख को मिटाने मंे इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होने जा रही है। वैसे तो मानव रहित विमानों के विकास के पीछे मंशा यह थी कि बगैर जान की हानि हुए सीमाआें की रखवाली (दबी जुबान में पड़ोसी देश के घर में ताकझांक) की जा सके। लेकिन जिस रफ्तार से इस क्षेत्र में तरक्की हो रही है उसे देखकर बड़े यकीन से कहा जा सकता है कि यूएवी का इस्तेमाल नागरिक कामों में जमकर होने वाला है। आज टनों वजनी यूएवी से लेकर आधा किलो वजन का यूएवी आपके निर्देश पर उड़ान भरने को तैयार है। यातायात, खेतीबाड़ी, खानों, पाइपलाइनों, महत्वपूर्ण ठिकानों की चौकसी, कार रेस, शूटिंग आदि के लिए भी यूएवी का इस्तेमाल हो सकता है। इजरायल के टोही विमानों की श्रंखला इस संभावना को और पुख्ता कर देती है। राजधानी के प्रगति मैदान में चल रहे डिफेंस एक्सो मंे इजरायल ने ढेरों यूएवी पेश किए हैं। इनमें बर्ड आई 400 एक ऐसा यूएवी है, जिसका कुल वजन पांच किलोग्राम है। इसे हाथ से हवा में उछाल कर उड़ाया जाता है। यह दस कि.मी. के दायरे में घट रही तमाम घटनाओं की तस्वीरें डेढ़ घंटे तक नियंत्रण यूनिट को भेज सकता है। इसी तरह इजरायल ने मॉस्किटो नाम से एक और यूएवी बनाया है, जिसका वजन सिर्फ आधा किलोग्राम है। इस समय कई तरह के यूएवी उपलब्ध हैं। फिक्स्ड विंग यानी विमाननुमा जैसे सर्चर, हेरोन, ग्लोबल हॉक आदि। दूसरे यूएवी हेलीकॉप्टरनुमा होते हैं, जिन्हें किसी भी पोत से भी उड़ाया जा सकता है। शहरी इलाकों में छत से उड़ा कर भीड़भाड़ वाले इलाके पर नजर रखने के लिए होवरक्राफ्ट जैसे यूएवी भी बन रहे हैं।

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