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अब आगरा में होगा गंगा-यमुना का संगम

गंगा और यमुना का संगम भले ही इलाहाबाद में होता हो, लेकिन अब सरकार गंगा और यमुना नदी के पानी को 600 किलोमीटर दूर आगरा में मिलाने जा रही है। इसके लिए राज्य सरकार ने 1100 करोड़ रुपए का एक पैकेज तैयार किया है। योजना के मुताबिक यमुना में गंगा का पानी डाला जाएगा। यह सब यमुना नदी को सूखने से बचाने के लिए किया जा रहा है। इस योजना के लागू हो जाने से आगरा और गाजियाबाद के लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। आगरा में तकरीबन छह सौ एमएलडी पानी की आवश्यकता है, लेकिन जलापूर्ति इसकी आधी हो पाती है। यमुना नदी में पानी कम है और जो पानी है भी वह प्रदूषित है। जिसे सामन्यत: पीने के उपयोग में नहीं लाया जा सकता। इसके अलावा टय़ूबवैल और हैंडपंपों से भी उचित जलापूर्ति नहीं हो पा रही है, क्योंकि वहाँ का जलस्तर लगातार घट रहा है। सपा सरकार के दौरान यमुना नदी में रामगंगा नदी से तीन सौ क्यूसिक पानी लेने की योजना बनाई गई थी। लेकिन तत्कालीन सरकार ने इस योजना को वहीं रोक दिया और उस पर ज्यादा काम नहीं किया। अब फिर से मुख्य सचिव प्रशांत कुमार मिश्र ने आगरा और गाजियाबाद के लोगांे को पानी उपलब्ध कराने की इस योजना की फाइल खुलवा दी है। राज्य सरकार ने जो योजना बनाई है उसके मुताबिक गंगा से प्रति दिन 300 क्यूसिक पानी लेकर यमुना में छोड़ा जाएगा। इसके लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करनी होगी ताकि गंगा का पानी यमुना तक आ सके। राज्य सरकार ने इस काम की जिम्मेदारी जल निगम को सौंपी है कि वह रामगंगा का पानी यमुमना में लाने की व्यवस्था करे। इसके लिए सरकार ने पहले चरण के कार्य के लिए 1100 करोड़ रुपए धन देने का प्रस्ताव भी दे दिया है। प्रदेश सरकार ने सिंचाई विभाग को यमुना नदी के लिए पानी छोड़ने के लिए कहा है। इसी के साथ और उत्तरांचल सरकार को भी पत्र लिखकर गंगा में निरंतर पानी बनाए रखने का सहयोग देने का आग्रह किया है।

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