अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे

न बेंच है न भवन है। खुले आसमां के नीचे पढ़ने का आसियां है। यही है हमारे शिक्षण संस्थानों की तस्वीर, जो सरकार के सुशासन के नारे को चिढ़ा रही है। शहर के वार्ड संख्या चार स्थित हरिजन टोला प्राथमिक विद्यालय, चर्च रोड के 20-25 छात्र स्कूल पढ़ाई करने आते हैं, लेकिन मध्याह्न् भोजन की खिचड़ी का स्वाद उन तक नहीं पहुंच पाता है।ड्ढr सरकारी रजिस्टर में 120 छात्र हैं, लेकिन खाद्यान्न नहीं मिलने पर सौ छात्र-छात्राआें की संख्या नगण्य हो गई है। लगभग बीस छात्र खुले आसमां के नीचे जमीन पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं।ड्ढr ड्ढr छात्रों को पढ़ने के लिए तीन शिक्षक सहजानन्द सिंह, मीना कु मारी व शशिप्रभा एक साथ बच्चों का तालीम दे रही हैं। कौन छात्र किस कक्षा के हैं कहना मुश्किल है। मध्याह्न् भोजन बंद होने पर शिक्षकों का कहना है कि खद्यान्न का उठाव जनवितरण प्रणाली के दुकानदार द्वारा नहीं किया जा सका है। स्कूल में कोटा से आपूर्ति बंद होने पर खिचड़ी व्यवस्था ठप है। चर्च रोड स्थित गैरमजरूआ जमीन पर वषरे से चलने वाला विद्यालय एक भवन के लिए तरस रहा है। पढ़ने वाले छात्रों को नहीं मालूम कि डेस्क बेंच क्या होता है। उन्हें तो बस जमीन पर बैठने की आदत है। उसमें भी आगे बैठने के लिए जद्दोजहद है। भवन नहीं होने पर मोहल्लेवालों ने छात्रों के सिर के ऊपर पलानी लगाया है, ताकि बरसात के दिनों में बच्चों क ो पानी से बचाया जा सके। बरसात के दिनों में स्कू ल के पास पानी जमने से आसपास के लोग घर से अपनी चौकी लाकर लगा देते हैं। बच्चे पानी से बचने के लिए चौकी पर बैठकर पढ़ते हैं। स्कूल के नाम पर एक ब्लैकबोर्ड, मास्टर जी के बैठने के लिए फाइवर की तीन कुर्सियां एवं रजिस्टर है। जो विद्यालय बंद होने पर किसी मुहल्लेवासी के घर की शोभा बढ़ा रहे हैं। बाढ़ शहर के मध्य मंे स्थित इस स्कू ल के पास में ही प्राइवेट स्कूल है। जहां काफी तादाद में बच्चों की संख्या है।ड्ढr ड्ढr मोहल्ले के समर्थ व्यक्ित अपने बच्चों का नामांकन चर्च स्कूल में कराकर शिक्षा की तालीम दे रहे हैं। कहने को तो सरकारी विद्यालय में दावा है कि भले ही 120 की जगह 20 छात्र हैं। लेकिन नियमित पढ़ाई हो रही है। वैसे भी देखा जाये तो एक शिक्षक पर सात छात्र की ही संख्या है। दलित उत्थान के लिए सरकारी दावा जो रहे लेकिन चर्च रोड हरिजन टोला मध्य विद्यालय के छात्र तभी उस खर्चे से संतुष्ट होंगे, जब उनके सिर के ऊपर विद्यालय की छत एवं बैठने के लिए बेंच होगा। मोहल्लेवाले आज भी सरकार से आस लगाए हुए हैं कि एक न एक दिन जरूर मध्य विद्यालय का कायाकल्प होगा। बहरहाल उनका सपना पूरा कब होगा यह आने वाले कल को ही पता है।ं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे