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कोर्ट ने वरुण पर रासुका लगाने का औचित्य पूछा

सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर उससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता वरुण गांधी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत बंद करने का औचित्य पूछा। सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर उससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता वरुण गांधी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत बंद करने का औचित्य पूछा। प्रधान न्यायाधीश के.जी बालाकृष्णन और न्यायमूर्ति पी. सथाशिवम की पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करने के बाद मामले की सुनवाई 13 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी। भड़काऊ भाषण देने के आरोप में वरुण को गत 28 मार्च को जेल ोज दिया गया था। उन्होंने खुद को रासुका के तहत बंद किए जाने को बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। पीठ ने ऐसे संकेत भी दिए कि उत्तर प्रदेश के पीलीभीत संसदीय क्षेत्र में नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 16 अप्रैल है और गांधी को उससे पहले ही जमानत पर छोड़ा जा सकता है। वरुण के वकील और पूर्व अतिरिक्त महान्यायवादी मुकुल रोहतगी की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा वरुण को नामांकन दाखिल करने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। वरुण पर पीलीभीत क्षेत्र में हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप में रासुका लगाया गया था। सुरक्षा कारणों से बुधवार को उन्हें पीलीभीत जेल से एटा जेल ले जाया गया था।

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