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सरकार ने चिविवि से माँगा निजी प्रैक्िटस का विकल्प

शाहूजी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय में अनुबंध पर डाक्टर रखने का प्रस्ताव खारिज हो गया। विवि के कुलपति का कहना है कि चिकित्सकों को ‘फिक्स’ वेतन देकर उन्हें प्राइवेट प्रैक्िटस करने की छूट दी जाए। शासन ने कुलपति से प्राइवेट प्रैक्िटस के विकल्प का प्रस्ताव माँगा है।ड्ढr चिकित्सा विवि और राज्य मेडिकल कालेजों के डाक्टरों की प्राइवेट प्रैक्िटस और अवस्थापना सुविधाआें को लेकर सोमवार को शासन स्तर पर एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई थी। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव फतेहबहादुर,चिकित्सा विवि के कुलपति डा. एसके अग्रवाल, मेडिकल कालेजों के प्राचार्य, चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक व अधिकारी मौजूद थे।ड्ढr कुलपति श्री अग्रवाल ने सरकार के समक्ष आँकड़े देकर बताया कि शाहूजी महाराज चिकित्सा विवि में अवस्थापना सुविधाएँ एम्स और संजय गांधी पीजीआई से कहीं आगे हैं। यहाँ इन संस्थाआें से अधिक मेडिकल छात्र हैं। ज्यादा बड़ी फैकल्टी है। इन संस्थानों से कई गुना ज्यादा मरीज यहाँ रोज देखे जाते हैं। फिर भी शिक्षकों का वेतन सबसे कम है। शासन की तरफ से मेडिकल विवि में अनुबंध पर चिकित्सक रखने का प्रस्ताव आया। लेकिन कुलपति ने कहा कि यह संभव नहीं है। इससे विवि की फैकल्टी कम हो जाएगी। यह एमसीआई के मानकों के अनुरूप नहीं होगा।ड्ढr उन्होंने प्रस्ताव रखा कि मेडिकल विवि के शिक्षकों को नित्यानंद कमेटी की संस्तुतियों के अनुरूप संशोधित दर से वेतन दिया जाए। जिसमें प्रोफेसर स्तर के चिकित्सकों को 48000 रु., एसोसिएट प्रो. को 35000 रु., सहायक प्रो. को 30000 और प्रवक्ताआें को 25000रु. प्रतिमाह वेतन देने की संस्तुति थी। उन्होंने कहा कि यह वेतन ‘फिक्स’ हो।ड्ढr चिकित्सकों को आठ घंटे की डय़ूटी करनी होगी। वे शिक्षकों के सारे काम करेंगे। विभागाध्यक्ष के पद तक उन्हें प्रोन्नति भी मिलेगी। लेकिन वह कुलपति या डीन जैसे प्रशासनिक पदों पर काम नहीं कर सकेंगे। इसके बदले उन्हें प्राइवेट प्रैक्िटस की छूट मिलनी चाहिए। सूत्रों ने बताया कि शासन ने कुलपति की तरफ से यह प्रस्ताव लिखित रूप में माँगा है। बाद में सरकार उच्च स्तर पर इस प्रस्ताव पर विचार करेगी।

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  • Web Title: सरकार ने चिविवि से माँगा निजी प्रैक्िटस का विकल्प