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विज्ञान लोकप्रिय फिल्मों को समझने में विफल है भारत

ैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के इतिहास के प्रोफेसर प्रो. विनय लाल ने कहा कि भारत में मुख्य धारा का समाज विज्ञान लोकप्रिय फिल्मों के माहौल को समझने में विफल रहा है। इसका कारण यह है कि समाज विज्ञानों में हर तरह की चीजंे हमने पश्चिम से उधार लिया। श्री लाल सोमवार को एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इन्सटीच्यूट (आद्री) के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। सेमिनार का विषय है ‘तुलनात्मक परिदृश्य में भोजपुरी सिनेमा’।ड्ढr ड्ढr पुणे के फिल्म एण्ड टेलीविजन इन्सटीच्यूट के पूर्व निदेशक त्रिपुरारी शरण ने फिल्म उद्योग और भूमंडलीकरण के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डाला। आद्री के निदेशक प्रो. पी घोष ने सहभागियों का स्वागत किया।ड्ढr सेमिनार मुख्य उद्येश्य विभिन्न प्रसिद्ध लोक संस्कृतियों के अध्ययन की आवश्यकता पर प्रकाश डालना है ताकि समाज, राजनीति और संस्थानों की गहरी जानकारी मिल सके। सेमिनार का अंतिम दिन मंगलवार को सामाजिक गतिशीलता, मध्य एवं निम्न जातियों के बीच आत्मसम्मान, शहरीकरण, पलायन और भूमंडलीकरण से भोजपुरी सिनेमा के संबंध आदि विषयों पर चर्चा होगी।

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