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कोसोवो की फांस

रविवार को प्रिस्टीना की सड़कों पर लाल झंडे लेकर चल रही भीड़ का उत्साह देखने लायक था। आतिशबाजी से नारेबाजी तक सब कुछ था वहां। कोई नया देश जब आकार लेता है, तो ऐसे उत्साह का दिखना कोई नई बात नहीं है। फिर कोसोवो के लोगों के लिए तो यह बड़ी बात इसलिए थी कि सर्बिया के साथ लंबे रक्तरंजित जातीय युद्ध से निकल कर आई कोसोवो की जनता के लिए यह राहत का क्षण भी होगा। बीस लाख आबादी वाले इस नए देश कोसोवों के निर्माण का यह उत्साह जरा और गौर से देखने में तमाम आशंकाआंे में बदल जाता है। सबसे पहले तो इसलिए कि यह यूरोप का सबसे गरीब देश होगा, जहां बेरोजगारी और आर्थिक संकट बुरी तरह छाया हुआ है। अभी तक दुनिया का यह छोटा सा इलाका अपने संसाधनों के लिए पूरी तरह से सर्बिया पर निर्भर करता है। लेकिन यह सर्बिया से बगावत करके और पश्चिमी ताकतों की मदद से अलग हुआ है, इसलिए अब वह इस आर्थिक मदद की उम्मीद नहीं कर सकता। हालांकि कोसोवो ने अपने को लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और बहुजातीय देश घोषित किया है, पर यह सब आसान नहीं है। वहां की आबादी में तकरीबन 0 फीसदी अल्बानिया मूल के लोग हैं, और बाकी में ज्यादातर सर्ब हैं। सर्ब आबादी कोसोवो को मान्यता नहीं देती। ये दोनों ही जातीयां एक दूसरे से नफरत करती हैं। अब इबार नदी के इस पार कोसोवो है और उस पार सर्बिया। कोसोवो के लिए उस पार के सर्बिया से लगातार झगड़ते हुए, अपने भीतर की सर्ब आबादी के साथ शांतिपूर्ण ढंग से रह पाना एक असंभव सी दिखने वाली चुनौती है। कोसोवो की सारी दिक्कतें यहीं खत्म नहीं हो जाती। उसे मान्यता देने की राजनीति ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दो हिस्सों में बांट दिया है। एक तरफ अमेरिका और यूरोप के कई देशों ने उसे जिस तरह फटाफट मान्यता दी मानों वे इसका इंतजार ही कर रहे थे। सर्बिया तो खैर इसके विरोध में है ही रूस और यहां तक कि स्पेन भी इसका विरोध कर रहे हैं। तर्क यह है कि संयुक्त राष्ट्र का मिशन वहां समस्या का हल खोजने में जुटा था तो इस तरह कोसोवो को अलग देश घोषित करना गलत है। रूस की समस्या यह है कि कोसोवो तो उसका सरदर्द बनेगा ही और अगर यही सिलसिला चला तो बोस्नियां और चेचन्या भी उसके लिए परेशानियां खड़ी करेंगे। अभी ही इन देशों के बागी उसका जीना हराम किए हुए हैं। यूगोस्लाविया के बाल्केनाइजेशन से निकला जातीय युद्ध का यह भूत विभिन्न जातीयों को तो आपस में लड़ा ही रहा है, साथ ही यह आस-पास के देशों को भी चैन की सांस नहीं लेने दे रहा। दिक्कत इसलिए भी है कि इसने इस्लामिक आतंकवाद से भी समीकरण बना लिए हैं। ऐसे में एक स्वतंत्र देश के रूप में कोसोवो का निर्माण समाधान के बजाए समस्या को बढ़ाने का कारण ही बन सकता है।

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  • Web Title: कोसोवो की फांस