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पप्पू की किडनी

यह खुशी की बात है कि विद्या प्रकाश उर्फ पप्पू जाटव की दोनों किडनी मौजूद हैं। इसमें पेच सिर्फ इतना है कि पप्पू जाटव उन सज्जन का नाम है जिनकी शिकायत पर कुख्यात किडनी कांड का भंडाफोड़ हुआ था। पुलिस का कहना है कि पप्पू को भी यह मुगालता था कि उसकी एक किडनी डॉ. अमित कुमार ने निकाल ली है और वह काफी एहतियात के साथ डर-डर कर जी रहा था। अब पप्पू तो चैन की सांस ले सकता है, लेकिन पुलिस के लिए समस्या पैदा हो गई है। पुलिस का कहना है कि फिक्र की कोई बात नहीं है, उसके पास आेर भी कई गवाह हैं, लेकिन पहली ही गेंद अगर वाइड हो जाए तो मामला थोड़ा गड़बड़ हो ही जाता है। जाहिर है पप्पू की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया, तमाम गिरफ्तारियां वगैरा भी हो गईं, लेकिन शिकायत करने वाले की मेडिकल जांच करने की फुरसत अब मिली। अपने शरीर पर ऑपरेशन का निशान देखकर पप्पू ने भी यह समझा कि उसकी किडनी गई आेर पुलिस ने भी। यह खयाल किसी को आता भी कैसे कि डॉ. अमित कुमार ने उसका पेट खोलकर फिर सिल दिया। किसी वजह से उसने किडनी निकालना ठीक नहीं समझा, न ही पप्पू को यह बताना कि उसकी दोनों किडनी सुरक्षित हैं। वैसे विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम ने डॉ. अमित कुमार से बात करके यह बताया है कि नीम हकीम डॉ. अमित कुमार का सर्जरी का कौशल और ज्ञान बहुत अच्छा है। यह बात हम कई सारे उच्च डिग्रीधारी डॉक्टरों के बारे में नहीं कह सकते। पप्पू की किडनी से जो मामला खड़ा हुआ है, उसने इस तरह हमारे चिकित्सा तंत्र, उससे संबंधित कानून, चिकित्सा शिक्षा और पुलिस जांच के तौर-तरीकों पर कई सारे सवाल खड़े किए हैं। इस मामले का हमारे कानूनी तंत्र में जो भी हश्र हो, यह कह सकते हैं कि पप्पू के लिए यह सुखद ही रहा। इस कांड ने उसे कुछ ख्याति संभवत: कुछ कुछ धन भी तो दिलवा ही दिया होगा, और ऊपर से दोनों किडनी भी सुरक्षित। इस देश में एक गरीब मजदूर को और क्या चाहिए।

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