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सरकार ने की बिजली हानि रोकने की ताकीद

सरकार के लिए बिजली नुकसान का मुद्दा लगातार गले की हड्डी बना हुआ है।देश में व्यवसायिक व तकनीकी कारणों से होने वाला बिजली नुकसान 35 प्रतिशत से भी अधिक है। बिजली मंत्रालय ने इस नुकसान को कम करके 15 प्रतिशत पर लाने की जीतोड़ कोशिश की, करोड़ों रुपये की महत्वकांक्षी योजनाएं बनाई गईं, लेकिन यह समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही। एक दूसरी बड़ी समस्या यह है कि देश के अधिकांश राज्यों में बिजली के उत्पादन में लगातार गिरावट का रुझान बना हुआ है। 1में देश में उत्पादित कुल बिजली में राज्यों की हिस्सेदारी लगभग 82 प्रतिशत थी जोकि वर्तमान में 55 प्रतिशत तक आ चुकी है। बिजली मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने राज्यों के प्रमुख सचिवों की बैठक में फिर से राज्यों को तकीद किया कि वे न केवल बिजली नुकसान की मात्रा में उल्लेखनीय कमी लाएं बल्कि अपना उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी सक्रियता से काम करें। बिजली को लेकर सरकार की जो सबसे चर्चित योजना है वह यह कि 2012 तक देश के सभी घरों तक बिजली पहुंचा दी जाएगी, लेकिन अगले चार सालों में सरकार किस जादू की छड़ी से ऐसा कारनामा कर देगी, यह एक रहस्य है। यह एक बड़ी विडंबना है कि इतनी किल्लत के बावजूद देश की 35 प्रतिशत बिजली का सालाना औसत नुकसान हो जाता है। पावर फाइनेंस कार्पोरेशन (पीएफसी) के सूत्रों के अनुसार, 2005-06 में राष्ट्रीय स्तर पर राज्य बिजली वितरण केन्द्रों का कुल तकनीकी और व्यवसायिक नुकसान (एटी एंड सी) 34.54 प्रतिशत रहा। इस भारी नुकसान में तकनीकी कारणों से हुआ नुकसान, बड़े पैमाने पर बिजली चोरी तथा वैध ग्राहकों द्वारा उपयोग में लाई जा रही बिजली शामिल है जिसके लिए वे कोई शुल्क अदा नहीं करते। केन्द्रीय बिजली प्राधिकरण द्वारा ट्रांसमिशन और वितरण नुकसान में कमी के लिए जो दिशानिर्देश जारी किए गए हैं उसके अनुसार, भारतीय परिस्थितियों में लगभग 10 से 15 प्रतिशत बिजली का नुकसान ऐसा होता है जो लगभग अपरिहार्य है अर्थात इसे रोका नहीं जा सकता। बिजली चोरी तथा ट्रांसमिशन और वितरण मामले में होने वाले भारी नुकसान का खामियाजा पूरे देश की खासकर करों के बोझ से कराह रहे आम लोगों को उटाना पड़ता है। बिजली की चोरी से हर वर्ष होने वाले करोड़ों रुपए के नुकसान पर अंकुश लगाने के लिए सरकार इसका लेखा जोखा रखने वाली कंप्यूटर आधारित एक प्रणाली लागू करने की घोषणा कर चुकी है जिससे यह पता लग सकेगा कि कितनी बिजली की आपूर्ति की गई, उसमें से कितनी की खपत हुई, किसने निर्धारित मात्रा से अधिक बिजली खींची और कहां इसका नुकसान हुया।

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