अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दो दारोगा पर 18 साल बाद कसा शिकंजा

गृहमंत्रालय के नियमों से खेलते हुए एक भारतीय मुस्लिम परिवार को बांग्लादेशी घुसपैठिया साबित करने की कोशिश करने वाले बिहार पुलिस के दो दारोगा पर अठारह वर्षो बाद कानूनी शिकंजा अब कस जाएगा। वर्दी के रौब में जहां एक दारोगा ने अपने सहोदर भाई व उसके बीबी बच्चों को बांग्लादेशी घुसपैठिया साबित करने की कोशिश में दारोगा ने न सिर्फ एफआईआर दर्ज किया, बल्कि गृह मंत्रालय के नियमों से खेलते हुए उक्त परिवार के मुखिया को जेल के सलाखों के पीछे भी भेजा। उक्त मामला जिले के कोरानसराय थाना क्षेत्र का है। इधर बक्सर एसपी ने भ्रष्टाचार अधिनियम 15 के तहत 18 वर्षो बाद संज्ञान लेने की कार्रवाई के लिए डीआईजी को पत्र लिखा है।ड्ढr ड्ढr मठिला गांव निवासी निजामुद्दीन 10 में आरा में पुलिस सूचना विभाग में बतौर स्टेनो कार्यरत थे। अब भागलपुर में तैनात उक्त दारोगा द्वारा कोरानसराय थाना के तत्कालीन थानेदार गृजेश कुमार से मिलकर अपने भाई, उनकी बीबी तथा चार बच्चों के उपर बांग्लादेशी घुसपैठिया होने का तोहमत लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराया। वर्दी का ताकत दिखाते हुए गृजेश व पुलिसकर्मियों ने आरोपी इशहाक खां के घर जमकर तांडव मचाया तथा उसे गिरफ्तार कर थाने लाया। जबकि गृह मंत्रालय के अनुसार बगैर अनुमति के गिरफ्तारी नहीं हो सकती। बेजा पावर दिखाने के आरोप में दोनों दारोगा साथ थे। पुन: भाई के दुश्मन बने दारोगा निजामुद्दीन के पुत्र ने 1में इशहाक की पत्नी को अपने बाप के लाइसेंसी हथियार से भून डाला। थाना में मामला (34दर्ज हुआ। बाद में सुनवाई करते हुए चाची के हत्यारे भतीजे को न्यायालय ने उम्रकैद की सजा सुनाई। वहीं सोमवार अर्थात 18 फरवरी ’08 को दारोगा के लाइसेंसी हथियार को जब्त करने का आदेश दिया। उधर इशहाक ने गृह मंत्रालय में 1में मामला दाखिल किया तथा गृह मंत्रालय ने भी 2002 में उसे सबूतों के आधार पर आरोप मुक्त किया। अब मामले में ताजा घटनाक्रम में बक्सर एसपी डा. परेश सक्सेना ने भ्रष्टाचार अधिनियम के धारा 15 के तहत दोनों दारोगा के खिलाफ संज्ञान लेने तथा उनकी गिरफ्तारी की अनुमति डीआईजी से मांगी है।ं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: दो दारोगा पर 18 साल बाद कसा शिकंजा