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अभिये से माइंडवा अकबकाने लगा है..

बड़े दिनों के बाद वो दिन आ ही गया जिसका था बहुतों को इंतजार.. । सूबे में चुनावी गहमा-गहमी शुरू हो गयी। अगले दो-चार दिनों में ढोल-ताशे और नगाड़े बजने शुरू हो जायेंगे। झारखंड की जनता की किस्मत की लॉटरी (छोटी-सी) खुलनेवाली है। एमएलए-एमपी तो नहीं लेकिन मेयर, डिप्टी मेयर और ‘कमिश्नर’ बनने का गौरव हासिल होनेवाला है। हर मुहल्ले के भइया-भाभी, चाचा और चाची अब गली-गली घूमेंगे। घर-घर सिर्फ घूमेंगे ही नहीं, मांगंेगे वोट और कुछ देने का वायदा करेंगे। वाह वो दिन भी क्या दिन होंगे, जब कोई दीदी या भाभी राजधानी की टॉप (मेयर की) सीट पर बैठेंगी, लालबत्ती लेकर घूमेंगी और अपनी किस्मत के साथ-साथ राजधानी की किस्मत (! ) भी चमकायेंगी। सचमुच इ तो चमत्कार ही हो जायेगा रे भइया। सोच-सोच कर माइंडवा अकबका गया है। अलबत्ते हो रहा है। बहुते लोग अकबका गया है। इ अकबकौनी एक महीना तक लगातार जारी रहेगा। अब तो हर गली और मुहल्ला में भेंटानेवाला यही बोलिये रहा है- भइया, इस बार हमहूं ट्राइ कर लेते हैं। आखिर कब तक वेट करते रहेंगे। चांस लेकर देखने में आखिर का हर्जा है। हम कहते हैं कोई हर्जा नहीं है। एकदम से ट्राइ करना ही चाहिए। पता नहीं किस्मत में का लिखल है कौन जानता है..

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