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खराब बिजली मीटरों के विवादित आदेश का मसला विस में उठा

खराब बिजली मीटरों के मामले में उपभोक्ताओं से नियम विरुद्ध दर से वसूली के विवादित आदेश का मसला विधानसभा में भी उठा। पावर कारपोरेशन के इस आदेश में कहा गया था कि जब तक उपभोक्ता का खराब बिजली मीटर नहीं बदला जाता, तब तक सीसी-24 में प्रति किलोवाट प्रति माह 500 यूनिट की दर से यूनिटों की गणना की जाए। इस मामले में ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय ने मंगलवार को सदन में दिए एक लिखित वक्तव्य में बताया कि राज्य विद्युत नियामक आयोग के आदेश के आधार पर पावर कारपोरेशन के इस आदेश को आयोग द्वारा अंतिम फैसला लिए जाने तक स्थगित कर दिया गया है। विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर के निर्देश पर ऊर्जा मंत्री ने यह वक्तव्य भाजपा के श्यामदेव राय चौधरी द्वारा नियम-51 के तहत दी गई सूचना पर दिया। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि उपभोक्ताओं के खराब मीटरों को समय से न बदलने पर अधिकारियों और कर्मचारियों को भी उत्तरदायी ठहराया गया है। इस आदेश के द्वारा किया जाने वाला राजस्व निर्धारण मीटर के ठीक होने के पश्चात भविष्य के विद्युत बिलों में समायोजित करने का प्रावधान है। श्री उपाध्याय ने कहा कि कारपोरेशन प्रबंधन द्वारा जारी यह आदेश केवल अंतरिम व्यवस्था के तहत जारी किया गया था। श्री चौधरी ने इस मामले को उठाते हुए यह तर्क दिया कि विद्युत आपूर्ति संहिता-2005 के तहत जिन उपभोक्ताओं के मीटर खराब हैं, उनकी बिलिंग उनके खराब मीटर को बदले जाने की तिथि से पिछले तीन बिलों के औसत उपभोग के आधार पर किए जाने का प्रावधान है।

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  • Web Title: खराब बिजली मीटरों के विवादित आदेश का मसला विस में उठा