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सामूहिक खेती कर रहीं दलित महिलाएं

प्रखण्ड के मनेर तेलपा, महम्मदपुर, पड़रियावां, मोहनचक, शिवगढ़ आदि गांवों की मलिन बस्तियों में रहनेवाली दलित जातियों की महिलाएं आज सामूहिक खेती के जरिये अपनी आर्थिक स्वावलंबन की राह पर आगे बढ़ रही है। आनेवाले दिनों में मेहनतकश ये महिलाएं अन्य दूसरे गांवों की महिलाआें के लिए पथ प्रदर्शक का कार्य करेंगी। मनेर-तेलपा गांव के निवासी सुदामी देवी इस वर्ष 20 महिलाआें के साथ मिलकर सामूहिक खेती की है। आपस में पैसे जमाकर गांव के एक किसान से एक बीघा जमीन पट्टे पर लिया। 55 सौ रुपए की लागत खेती करने में लगा।ड्ढr ड्ढr आमदनी हुई कुल सौ रुपए। सामूहिक खेती के माध्यम से अपनी आमदनी करनेवाली ये महिलाएं खुश हैं। महम्मदपुर गांव के चानमती देवी के नेतृत्व में 17 महिलाएं, मोहनचक गांव के आशा देवी के नेतृत्व में 14 महिलाएं, पड़रियावां की गायत्री देवी के नेतृत्व में महिलाएं तथा ग्राम शिवगढ़ की गुड़िया देवी के नेतृत्व में महिलाएं सामूहिक खेती के द्वारा आर्थिक स्वावलंबन की आेर तेजी से बढ़ती जा रही हैं। मोहनचक गांव की आशा देवी बताती है कि पहले हमलोगों का कोई ठौर-ठिकाना नहीं था। परन्तु आज हम महिलाएं प्रतिमाह अपने परिवार के प्रत्येक व्यक्ित के 10-10 रुपए नाम से जमा करती हैं। किसी के घर आकस्मिक घटना घटने पर हम उनकी आर्थिक सहायता करते हैं। अब गांव के बड़े महाजनों से कर्ज लेना बंद कर दिया है। महिला एकता मंच की संयोजिका स्वर्णलता ने आर्थिक क्षेत्र में हाशिए पर खड़ी इन महिलाआें की प्रयास की सराहना की है, परन्तु इन महिलाआें ने राष्ट्रीयकृत बैंकों की उपेक्षापूर्ण भूमिका पर दु:ख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इन महिलाआें का स्थानीय बैंकों में स्वयं सहायता समूह के रूप में खाता भी नहीं खुल पाया है। जबकि इसके लिए ये महिलाएं कई बार बैंकों का दरवाजा खटखटा चुकी हैं।

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