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ईसाई तीर्थयात्रियों को सब्सिडी का औचित्य?

आंध्र प्रदेश सरकार ने ईसाइयों को इजराइल की धार्मिक यात्रा पर जाने के लिए सब्सिडी देने का फैसला किया है, यह स्वागतयोग्य है। इस तरह की मांग यीशू मसीह के 2000वें जन्म दिवस के अवसर पर थी कि जो ईसाई यरोशलम (इजराइल) की तीर्थ यात्रा पर जा रहे हैं, उन्हें सब्सिडी दी जाए। केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली राजग सरकार थी। सरकार ने इसे नहीं माना इसके बावजूद भारत से 700 ईसाई यीशू मसीह के जन्म स्थल यरोशलम गए थे। 1में खालसा पंथ का 300वां जन्म दिवस मनाया गया था। इसके लिए सरकार ने उन्हें आर्थिक अनुदान दिया था। इसी आधार पर हमने यरोशलम यात्रा में सब्सिडी देने की मांग की थी, लेकिन वर्तमान में ऐसी कोई मांग नहीं की है।ड्ढr इस सब्सिडी को हज सब्सिडी की तरह बताया जा रहा है, जो सही नहीं है। इस्लाम में हज का जो महत्व है वह महत्व इजराइल की तीर्थ यात्रा का नहीं है। हज मुक्ित का एक साधन माना जाता है, वैसा यहां नहीं माना जाता है। जहां तक तीर्थ यात्रा का सवाल है सभी धमरे में इसका अपना महत्व है और यह उसकी आस्था से जुड़ा मामला है। ईसाइयों का तीर्थ स्थल इजराइल और फलस्तीन में हैं। बैतुललेहम में यीशु मसीह का जन्म हुआ था और यरोशलम में उन्हें सूली पर चढ़ाया गया था। इस स्थान पर सूली चढ़ने से पूर्व शाम के समय उन्होंने लम्बी प्रार्थना की थी। इसके अलावा भी अनेक स्थान हैं ईसाइयों की आस्था से जुड़े हुए हैं और वहां जाने से पुण्य प्राप्त होता है। फलस्तीन का वह पहाड़ भी ईसाइयों के लिए आस्था का केन्द्र है, जहां हजरत मूसा को नबुवत मिली थी। ईसाई जनसंख्या के लिहाज से केरल और उत्तर पूर्व में मेघालय, नागालैंड और मिजोरम जैसे राज्य हैं जहां ईसाई बहुसंख्यक हैं। यदि इन राज्यों सहित देश के बाकी ईसाइयों को इजराइल की तीर्थ यात्रा पर जाने के लिए सरकार द्वारा कोई आर्थिक अनुदान मिलता है तो यह हमारे लिए खुशी की बात है। भारत से लगभग एक हजार ईसाई प्रति वर्ष इजराइल की तीर्थ यात्रा पर जाते हैं।ं

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