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उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पाद शुल्क में कमी की मांग

देश के उपभोक्ता वस्तु उद्योग ने आगामी बजट में वित्त मंत्री से उत्पाद शुल्क में कमी करने की गुजारिश की है। उद्योग का मानना है कि लगभग 10 से 15 प्रतिशत से बढ़ रहा इसका बाजार उत्पाद शुल्कों में कमी किए जाने तथा मौजूदा शुल्क संरचना को युक्ितसंगत बनाने से और तेजी से फर्राटे भरने लगेगा। उद्योग के सूत्रों ने बताया कि लोगों की क्रय शक्ित में सुधार होने, जीवन स्तर के बेहतर होने, मनोरंजन और सूचना प्राप्ति के लोगों की प्राथमिकताओं में शुमार होने, सामाजिकता से कटकर व्यक्ितवादी या एकल परिवार की प्रवृत्ति के बढ़ने से भी इस क्षेत्र को बढ़ावा मिल रहा है। पिछले कुछ समय से इसमें एक खास बदलाव यह देखने में आ रहा है कि अमुमन लोग पहले जहां सस्ते उत्पादों (एन्ट्री लेवेल की वस्तुओं) में दिलचस्पी दिखाते थे, वहीं उनका रुझान अब प्रीमियम वस्तुओं की तरफ तेजी से बढ़ा है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में उपभोक्ता वस्तुओं पर लगभग 16 प्रतिशत का उत्पाद शुल्क लगाया जाता है। उद्योग का मानना है कि इसमें 50 प्रतिशत की कमी न भी की जाए तो भी 25 प्रतिशत की कटौती अवश्य की जाए। अर्थात इसे वर्तमान 16 प्रतिशत से कम करके 12 प्रतिशत तक अवश्य ले आया जाए। इससे उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में कमी आएगी तथा उनका बाजार और तेजी से बढ़ेगा। जानकारों के अनुसार, पड़ोसी देशों खासकर थाईलैंड के साथ शुल्क संरचना में सुधार लाने से इस उद्योग को काफी बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने बताया कि फिलहाल वहां से आयातित उत्पादों तथा संबंधित वस्तुओं पर सीमा शुल्क बेहद कम लगता है। इस शुल्क संरचना को और युक्ितसंगत बनाये जाने की जरूरत है। यही नहीं, जहांतक रंगीन टीवी का सवाल है तो पैनल आदि के आयात में छूट दिए जाने से देश में भी एलसीडी टीवी के निर्माण को काफी बढ़ावा मिलेगा।

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  • Web Title: वस्तुओं के उत्पाद शुल्क में कमी की मांग