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पहली बार सूबे में ‘बिहार विज्ञान कांग्रेस’ का होगा आयोजन

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के बैनर तले पहली बार सूबे में बड़े पैमाने पर ‘बिहार विज्ञान कांग्रेस’ के आयोजन का निर्णय लिया गया है। प्रदेश में विज्ञान के प्रति छात्रों की रुचि बढ़ाने एवं शोधार्थियों की जिज्ञासा को मिटाने में यह विज्ञान कांग्रेस कारगर सिद्ध होगी। राजधानी में 18 से 20 मार्च को आयोजित होने वाली विज्ञान कांग्रेस में देश-विदेश के चर्चित वैज्ञानिकों एवं विज्ञान विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है। देश के प्रसिद्ध वैज्ञानिक एवं पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम और केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव डी. रामास्वामी भी कांग्रेस में शिरकत करेंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उद्घाटन करेंगे। ज्ञान के इस महाकुंभ का आयोजन ‘बिहार ब्रेन’ के सह-आयोजन में किया जा रहा है।ड्ढr ड्ढr विज्ञान कांग्रेस में समीर ब्रह्मचारी और आरके पचौरी समेत कई विद्वानों ने आतिथ्य स्वीकार कर लिया है। वर्तमान सरकार में वैज्ञानिक सत्रों के लगातार आयोजन का मूल उद्देश्य छात्रों के बीच विज्ञान की उपयोगिता की जानकारी देना है। प्रदेश में भी विज्ञान से संबंद्ध शोधों की संख्या बढ़े इसके लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग लगातार कार्यशालाओं एवं सेमिनारों का आयोजन कर रहा है। इसके पूर्व दिसम्बर में तीन दिवसीय ‘साइंटिफिक फोरसाइट’ का आयोजन किया गया था जिसमें देशी-विदेशी शिक्षाविद्, वैज्ञानिक, उद्यमी समेत कई क्षेत्रों के विशेषज्ञ जुटे थे। वर्ष की शुरूआत में ‘नैनो मेडिसिन’ विषय पर पीएमसीएच परिसर में वैज्ञानिक सत्र का आयोजन किया गया था जिसमें स्वीडन के विशेषज्ञ शामिल हुए थे। बीते 16 फरवरी को ‘बायोटेक्नोलॉजी विषय’ पर राष्ट्रीय सेमिनार एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया था जिसमें आंध्र प्रदेश के बायोटेक्नोलॉजी सलाहकार एवं हैदराबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसई हसनैन ने व्याख्यान दिया था। स्कूल में छात्र-शिक्षक अनुपात सही नहीं मिला तो होगी कार्रवाईड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। किसी स्कूल में छात्रों और शिक्षकों की संख्या का अनुपात यदि निर्धारित मानदंड के अनुरूप नहीं पाया गया तो संबंधित जिले के डीएसई पर कार्रवाई होगी। मानव संसाधन विकास विभाग ने इस बाबत डीएसई को चेताया है। विभाग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वैसे स्कूल जिनमें पहले से ही 20 से अधिक शिक्षक हैं उनके लिए यदि दूसरे चरण में भी रिक्ितयां दिखाई गईं तो इसका औचित्य साबित करना होगा। जिले में तैनात विभाग के संबंधित अधिकारियों को उस स्कूल में बच्चों की संख्या भी बतानी होगी। जांच में यदि इसे आनुपातिक रूप से सही नहीं पाया गया तो इसके लिए संबंधित जिले के डीएसई को जिम्मेदार माना जाएगा और उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। इसके साथ ही बुधवार को विभाग में हुई बैठक में जिलों के डीएसई ने बताया कि पहले चरण में बहाल हुए शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच शुरू कर दी गई है। इसके लिए नियोजन इकाईवार पड़ताल जारी है। इस बाबत विभाग की अगली बैठक में विस्तृत समीक्षा होगी। बैठक में ‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री’ में आने वाली शिक्षा विभाग से जुड़ीं शिकायतों के निष्पादन की प्रगति को संतोषजनक बताया गया।

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