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कई निजी विद्यालयों की रद्द होगी मान्यता!

मानव संसाधन विकास विभाग द्वारा निर्धारित शतरे की अनदेखी करने वाले निजी विद्यालयों पर सरकार की नजर टेढ़ी हो गई है। विभाग ऐसे स्कूलों को दिए गए अनापत्ति प्रमाण पत्र वापस लेकर संबंधित बोर्ड को संबंधन रद्द करने की अनुशंसा कर सकता है। इस मुतल्लिक मिलीं ढेर सारी शिकायतों की जांच कराने पर विभाग में गहन मंथन चल रहा है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार राज्य में ऐसे कई स्कूल चलाये जा रहे हैं जो किसी बोर्ड से मान्यताप्राप्त नहीं हैं, लेकिन वे सीबीएसई और आईसीएसई का बोर्ड लगाकर छात्रों के साथ ठगी कर रहे हैं।ड्ढr ड्ढr विभाग के उप निदेशक और निजी विद्यालयों के प्रभारी सोहैब हासमी ने बताया कि ये स्कूल अपने यहां नामांकित छात्रों की परीक्षा पिछले दरवाजे से मान्यताप्राप्त स्कूलों से दिलाने में सफल हो जाते हैं। कुछ विद्यालय तो दूसरे ख्यातिप्राप्त स्कूलों के नाम से मिलता -जुलता नाम रख लेते हैं। ये ऐसे नामों का चयन करते हैं जिसका संक्षेप ख्यातिप्राप्त स्कूलों के संक्षिप्त नाम जैसा ही होता है। उपनिदेशक बताते हैं कि यह अभिभावकों के साथ धोखाधड़ी है। इसके अलावा विद्यालय के वार्षिक लेखा अंकेक्षण तथा वर्षिक प्रतिवेदन को सत्र चालू होने के पूर्व सार्वजनिक नहीं करते। अभिभवकों को भी इसकी जानकारी नहीं दी जाती। रोक के बावजूद नर्सरी स्कूलों में नामांकन के लिए परीक्षा ली जा रही है तो नामांकन नहीं होने पर निबंधन के लिए ली गई राशि लौटाई नहीं जाती है। जबकि यह अपेक्षा की जाती है कि ऐसी स्थिति में 80 प्रतिशत राशि लौटा दी जाय। ऐसी शिकायतों को लेकर सरकार गंभीर हो गई है। अधिकारी बताते हैं कि कई स्कूल अपेक्षित शतर्ों का पालन तो नहीं ही करते हैं अनिवार्य शर्तों की भी अनदेखी की लगातार शिकायतें मिल रहीं हैं।जांच के दौरान पकड़े जाने पर उनकी मान्यता रद्द किये जाने के लिए बोर्ड को लिखा जायेगा। विभाग एनआेसी तभी देता है जब विद्याालय शतरे को मानने का वादा करते हैं। वादाखिलाफी पर सरकार एनआेसी वापस लेने को स्वतंत्र है।ं

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