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बेमिसाल हुनर और कारीगरी की चमक

मोरहाबादी मैदान में चल रहे राष्ट्रीय सरस, हस्तशिल्प एवं खादी महोत्सव में देसी कारीगरी और उद्यमिता के विविध रंग दिख रहे हैं। यहां लगे पांच सौ स्टॉल में भिन्न- भिन्न राज्यों के कारीगरों की बेमिसाल हुनरमंदी दिखती है। बुधवार को मेले में खरीदारी करने तकरीबन 30 हजार लोग पहुंचे।ड्ढr महोत्सव में बुधवार को एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। दिन के चार बजे से शुरू हुआ गीत संगीत का दौर रात के नौ बजे तक चला। स्थानीय कलाकारों ने नागपुरी लोकनृत्य पेश किया। भागलपुर आकाशवाणी की मशहूर कलाकार सुलेखा रमैया ने भोजपुरी गीत गाकर सभी का मन मोह लिया। सुलेखा के गाये गीत ‘पायलिया बाजे छमा छम..’ और ‘अबकी फगुनमा में लेले अइहा हो साड़ी..’ को लोगों ने खूब सराहा। शाम छह बजे से झारखंड के मशहूर नर्तक विपुल नायक ने दीपांजलि ग्रुप के साथ शिरकत की। आशि सिन्हा,आराधना, रिया, सरोमना, रिया केसरी ,प्रज्ञा और रिचा ने बेहतरीन नृत्य की प्रस्तुति की। खासतौर पर लकड़ी का काठी काठी का घोड़ा पर दर्शकों ने खूब तालियां बजायीं।ड्ढr ड्ढr दुधिया रौशनी बिखेरता है हैदराबाद का मोती हैदराबाद चारमीनार से आये रामप्रकाश सिंह ने हैदराबादी मोती का स्टॉल लगाया है। 450 रुपये से लेकर 850 रुपये में गारंटी के साथ मोतियों के खूबसूरत हार यहां उपलब्ध हैं। प्रत्येक आभूषण पर 10 प्रतिशत की छूट है। उन्होंने मोती को आग में जलाकर दिखाया और कहा - प्लास्टिक होती तो जल जाती। कुछ ही पलों में आपका स्केच आपके हाथ मेंड्ढr पटना आर्ट कॉलेज के छात्र प्रवीण मेले में लोगों की तस्वीर पेंसिल के जरिये कुछ ही पलों में बना देते हैं। कीमत मात्र तीस रुपये। प्रवीण गया के रहने वाले हैं। डिजिटल कैमरे की फोटोग्राफी के इस दौर में भी आप स्केच से बनी अपनी तस्वीर से प्यार कर बैठेंगे।ड्ढr मधुबनी पेंटिंग्स का जलवाड्ढr देश- विदेश में चर्चित मधुबनी पेंटिग खादी मेले की शान है। मधुबनी के नेहरू चौक की रिंकी देवी इस दुर्लभ कला के प्रचार-प्रसार में जुटी हुईं है। रिंकी देवी ने बताया कि स्टॉल पर 150 रुपये से लेकर पांच हजार तक की कृतियां उपलब्ध हैं।

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