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तस्करों का प्रमुख अड्डा बना शहर

मादक तस्करों के लिए राजधानी एक प्रमुख मंडी बन चुकी है। गांजा से लेकर हेरोइन तक की तस्करी हो रही है। कभी सड़क मार्ग तो कभी रेल मार्ग से मादक पदार्थो को राजधानी में पहुंचाया जाता है और फिर यहीं होती है खरीद-बिक्री। पिछले दो वर्षो में एक दर्जन से अधिक दफे शहर में तस्करों की रंगेहाथ हुई गिरफ्तारी इसी सच्चाई पर मुहर लगाती है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सिर्फ गांधी मैदान और कदमकुआं थाना पुलिस द्वारा दो करोड़ से अधिक के नशीले पदार्थ बरामद किये जा चुके हैं।ड्ढr ड्ढr देश के अलावा विदेशों से भी तस्करी होकर मादक पदार्थ यहां पहुंचते हैं। शहर में स्मैक, हेरोइन, गांजा व अन्य नशीले पदार्थो के नशे के शिकार लोगों की संख्या कम नहीं है। यही वजह है कि अनेक स्थानों पर चोरी-छिपे या खुलेआम नशीले पदार्थो की बिक्री की जाती है। खासकर गांजा तो शहर के अमूमन हर इलाके में बिक रहा है। इन कारणों से शहर जहां नशीले पदार्थो के खपत का बड़ा बाजार है वहीं यहां से दूसरे जगहों पर तस्करी करने में भी आसानी होती है। सिर्फ सड़क मार्ग ही नहीं ट्रेनों के माध्यम से भी तस्करी होती है। आलम यह है कि राजधानी एक्सप्रेस जैसी वीआईपी ट्रेन की सुरक्षित बोगियों से भी कई बार मादक पदार्थो की बरामदगी हो चुकी है। विशेषकर राजधानी से सटे कुछ ग्रामीण इलाकों में चोरी-छिपे गांजा की खेती होती है। स्थितियों पर गौर करें तो स्पष्ट है कि विभिन्न जगहों के तस्करों का जमावड़ा शहर में होता है और फिर मादक पदार्थो की खरीद-बिक्री होती है। स्थिति व समय पर सभी तस्कर यहां पहुंचने के बाद होटलों में शरण लेते हैं और फिर गांजा-अफीम आदि लेकर निकल जाते हैं। पिछले कुछ वर्षो में खरीद-बिक्री के क्रम में ही ज्यादातर पुलिसिया छापेमारी भी हुई है।ंं

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